जबलपुर: अस्पताल में नवजात की अदला-बदली, डिस्चार्ज के समय सौंप दी दूसरे की संतान

Newzo
Newzo - News Editor 83 Views
3 Min Read

​सुरक्षा नियमों की अनदेखी के चलते मची अफरा-तफरी, सीसीटीवी फुटेज से खुला राज


​

जबलपुर। अधारताल क्षेत्र में स्थित जेठी हॉस्पिटल में प्रबंधन की एक बड़ी लापरवाही के कारण नवजात बच्चों की अदला-बदली का गंभीर मामला सामने आया है। अधारताल निवासी शकीर सिद्दीकी की पत्नी ने 21 मई 2026 को एक नवजात बच्ची को जन्म दिया था, जिसे स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के कारण जेठी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। शनिवार को जब शकीर सिद्दीकी अपने पूरे परिवार के साथ बच्ची को डिस्चार्ज कराने पहुंचे, तो अस्पताल प्रबंधन ने इलाज का पूरा भुगतान जमा कराने के बाद उन्हें बच्ची के स्थान पर एक नवजात लड़का सौंप दिया। नवजात को देखते ही परिजनों को संदेह हुआ और उन्होंने इसका कड़ा विरोध किया, जिसके बाद अस्पताल परिसर में भारी हंगामा शुरू हो गया। अस्पताल के भीतर ही जांच करने पर पता चला कि पीड़ित परिवार की नवजात बच्ची किसी दूसरे परिवार को सौंप दी गई थी और वह दूसरे अस्पताल में पहुंच चुकी थी।
​सीसीटीवी फुटेज से खुला लापरवाही का राज
​पीड़ित परिवार के आक्रोश और बढ़ते दबाव के बाद जेठी हॉस्पिटल प्रबंधन ने अपने परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की जांच शुरू की। सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर एक महिला नवजात बच्ची को अपने साथ लेकर अस्पताल से बाहर जाती हुई दिखाई दी। इसके बाद अस्पताल प्रशासन और पीड़ित परिवार ने मिलकर तुरंत बच्ची की तलाश शुरू की। काफी खोजबीन और प्रयासों के बाद शकीर सिद्दीकी की नवजात बच्ची जेके हॉस्पिटल में सुरक्षित मिल गई। जांच में सामने आया कि अस्पताल कर्मियों ने गलती से पीड़ित परिवार की बच्ची को किसी दूसरे परिवार को सौंप दिया था, जो उसे जेके हॉस्पिटल ले गए थे। बच्ची के सकुशल वापस मिलने पर पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली, लेकिन अस्पताल की इस घोर लापरवाही को लेकर उनका गुस्सा कम नहीं हुआ।
​सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर भड़के परिजन
​इस पूरी घटना ने निजी अस्पतालों में नवजात शिशुओं की सुरक्षा और पहचान से जुड़े अनिवार्य नियमों की पोल खोल दी है। चिकित्सा नियमों के अनुसार बिना डिस्चार्ज दस्तावेजों और पुख्ता पहचान सत्यापन के किसी भी नवजात शिशु को किसी अन्य व्यक्ति को नहीं सौंपा जा सकता, इसके बावजूद अस्पताल में इतनी बड़ी चूक हो गई। पीड़ित परिवार का आरोप है कि जब उन्होंने इस बड़ी लापरवाही के लिए जिम्मेदार दोषी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की, तो जेठी हॉस्पिटल प्रबंधन ने मामले को दबाने और रफा-दफा करने का प्रयास किया। प्रबंधन का तर्क था कि चूंकि बच्ची सुरक्षित मिल गई है, इसलिए अब विवाद की कोई बात नहीं है। अस्पताल के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये को देखते हुए पीड़ित परिवार ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

Share This Article
error: This Content is protected !!