जेल से बाहर आने की कवायद, डेढ़ सौ करोड़ के मालिक पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा ने पारिवारिक संकट को बनाया ढाल

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Newzo - News Editor 60 Views
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जबलपुर । मध्य प्रदेश के बहुचर्चित भ्रष्टाचार मामले के आरोपी पूर्व आरटीओ कांस्टेबल सौरभ शर्मा ने अपनी पत्नी की गंभीर बीमारी और बच्चों की देखभाल का हवाला देकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अस्थाई जमानत के लिए याचिका दायर की है। लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई में 150 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्ति के मालिक पाए गए सौरभ शर्मा वर्तमान में न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं। उन्होंने अपनी पत्नी की आगामी सर्जरी और पारिवारिक जिम्मेदारियों को आधार बनाकर अदालत से राहत मांगी है। दूसरी ओर, इस मामले को लेकर आम जनता और कानूनी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं, जहां कुछ लोग इसे केवल जेल से बाहर आने का एक बहाना मात्र मान रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत इस पर विचार कर रही है।

​लोकायुक्त की कार्रवाई , करोड़ों की बेनामी संपत्ति का खुलासा

​यह पूरा मामला तब सामने आया था जब लोकायुक्त की टीम ने तत्कालीन आरटीओ आरक्षक सौरभ शर्मा के ठिकानों पर छापेमारी की थी। जांच के दौरान अधिकारियों के होश उड़ गए जब एक छोटे पद पर तैनात कर्मचारी के पास से 150 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति के दस्तावेज और सबूत बरामद हुए। इस बड़ी कार्रवाई के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। इतनी बड़ी राशि और अवैध संपत्तियों के जुड़े होने के कारण यह मामला पूरे प्रदेश में लंबे समय तक सुर्खियों में बना रहा और अब भी इस पर प्रशासनिक स्तर पर नजर रखी जा रही है।

​पत्नी के इलाज को बनाया आधार, कोर्ट से लगाई गुहार

​लंबे समय से सलाखों के पीछे बंद पूर्व आरक्षक ने अब कानून से अस्थाई राहत पाने के लिए नया रास्ता चुना है। उनके वकीलों की तरफ से उच्च न्यायालय में पेश की गई अर्जी में कहा गया है कि उनकी पत्नी की तबीयत काफी खराब है और उन्हें तत्काल एक बड़े ऑपरेशन यानी सर्जरी की जरूरत है। इसके साथ ही घर में बच्चों की देखरेख करने वाला कोई दूसरा जिम्मेदार सदस्य नहीं है। इन्हीं मानवीय और पारिवारिक आधारों को सामने रखकर कुछ समय के लिए जमानत देने की गुहार लगाई गई है ताकि वे अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों को पूरा कर सकें।

​बीमारी के दावों पर उठते सवाल

​सौरभ शर्मा द्वारा दायर की गई इस नई अर्जी के बाद से ही स्थानीय स्तर पर और सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर काफी चर्चाएं गर्म हैं। आम चर्चाओं में यह बात कही जा रही है कि पत्नी की बीमारी और ऑपरेशन की बात सिर्फ एक कानूनी दांवपेच हो सकता है ताकि किसी भी तरह जेल की दीवारों से बाहर आया जा सके। जांच एजेंसियां भी इस तरह के मामलों में तथ्यों की पूरी बारीकी से जांच करती हैं। फिलहाल अदालत ने याचिका पर विचार करते हुए दोनों पक्षों के तर्कों और मेडिकल रिपोर्ट के आकलन के आधार पर आगामी फैसला सुरक्षित रखा है।

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