मरीज का इलाज हो न हो, बजट का ‘सफल ऑपरेशन’ कर गए जबलपुर के हेल्थ अफसर

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Newzo - News Editor 106 Views
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जबलपुर संजीवनी क्लीनिक घोटाला: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने अधिकारियों को दिया 15 दिन का अल्टीमेटम, होगी एफआईआर

​जबलपुर। जिला स्वास्थ्य विभाग में संजीवनी क्लीनिकों के राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) प्रमाणीकरण राशि में 58 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने वर्ष 2025-2026 में 58 संजीवनी क्लीनिकों के विकास के लिए 1 लाख रुपये प्रति संस्था की दर से राशि आवंटित की थी। राज्य स्तर पर हुई समीक्षा में सामने आया कि 56.98 लाख रुपये खर्च करने के बावजूद किसी भी संस्था का प्रमाणीकरण नहीं कराया गया। इस वित्तीय अनियमितता को लेकर जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवीन कोठारी, सहायक शहरी कार्यक्रम प्रबंधक संदीप नामदेव, जिला क्वालिटी मॉनिटर शिखा गर्ग और जिला लेखा प्रबंधक रेखा साहू को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। पत्र क्रमांक एन.एच.एम./शहरी स्वास्थ्य/2026/ई-1241172/06/1023 के तहत 15 दिनों में राशि रिकवरी न होने पर भ्रष्ट अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।

​कागजी खानापूर्ति और रंगाई-पुताई के नाम पर बजट ठिकाने लगाने का आरोप

​शहरी कार्यक्रम प्रबंधक संदीप नामदेव पर बिना एनक्यूएएस प्रमाणीकरण कराए सिर्फ कागजी खानापूर्ति करने के उद्देश्य से क्लीनिकों में केवल ऊपरी रंगरोगन कराने का आरोप है। जो भवन पहले से निर्मित थे या जिनका फर्श पूरी तरह ठीक था, उनमें दोबारा काम दिखाकर कुल बजट का 98.24% हिस्सा यानी 56.98 लाख रुपये का चूना सरकारी खजाने को लगाया गया। राज्य स्तरीय जांच टीम की समीक्षा के दौरान इस गड़बड़ी पर कड़ी नाराजगी जताई गई है। इसे राज्य स्तर से जारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन और संबंधित अधिकारियों की कार्य के प्रति घोर लापरवाही माना गया है। नोटिस की मियाद खत्म होने के बाद भी अधिकारी अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं कर पाए हैं, जिसके कारण अब उन पर वसूली और कानूनी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।

​बिना ओपन टेंडर नियमों को ताक पर रखकर स्थानीय स्तर पर बंदरबांट

​नियमों के अनुसार 58 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि के कार्यों के लिए खुली निविदा यानी ओपन टेंडर आमंत्रित किया जाना अनिवार्य था। इसके विपरीत जिला लेखा प्रबंधक रेखा साहू और एपीएम संदीप नामदेव ने आपसी सांठगांठ कर नियमों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया। अपने पसंदीदा वेंडरों को अवैध लाभ पहुंचाने और कमीशनखोरी के लालच में स्थानीय स्तर पर ही सामग्रियों की मनमानी खरीद दिखाई गई। प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि रेखा साहू की ऊंचे स्तर पर सेटिंग के कारण पूर्व में कई बड़े अधिकारियों के तबादले हो गए, लेकिन उनके खिलाफ कोई जांच शुरू नहीं हो सकी थी।

​मुख्य चिकित्सा अधिकारी पर मामले को दबाने और मौन संरक्षण देने का आरोप

​इस पूरे वित्तीय घोटाले को ठंडे बस्ते में डालने और दबाने का आरोप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. नवीन कोठारी पर लगा है। उन्होंने जिले की इस वास्तविक स्थिति और वित्तीय हेरफेर से राज्य मुख्यालय भोपाल को अवगत नहीं कराया। भोपाल स्थित मुख्यालय से 4 मई को ही इस संबंध में नोटिस जारी कर दिया गया था, लेकिन स्थानीय स्तर पर बड़े नेताओं और रसूखदारों के दबाव का इस्तेमाल कर मामले को लंबे समय तक दबाकर रखा गया। अब अपर मिशन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन दिशा प्रणव नशवंशी ने निर्देशित किया है कि यदि 15 दिनों के भीतर शहरी स्वास्थ्य संस्थाओं को एनक्यूएएस प्रमाणीकरण की कार्रवाई से अवगत नहीं कराया गया, तो सख्त दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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