
जबलपुर। जबलपुर सहित पूरे मध्यप्रदेश के आबकारी विभाग में वरिष्ठ स्तर पर होने वाली पदोन्नति की फाइल फिलहाल शासन स्तर पर अटक गई है। सरकारी विभागों में जहां पदोन्नति की सूची तेजी से जारी हो रही है, वहीं आबकारी विभाग में यह प्रक्रिया ठप पड़ी है। इस मामले में मुख्य सचिव अनुराग जैन ने प्रमुख सचिव अमित राठौर को सख्त निर्देश दिए हैं, जबकि उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने भी विभागीय कामकाज को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। विभाग के 70 से अधिक अफसरों की पदोन्नति सूची पर निर्णय लेना बाकी है। इस पूरी कवायद के बीच जांच के दायरे में आए 4 प्रमुख अफसरों की भूमिका ने स्थिति को और उलझा दिया है, जिसके कारण विभाग में पदोन्नति का रास्ता फिलहाल बंद नजर आ रहा है।
जांच में फंसे अफसरों की बढ़ी मुश्किल
आबकारी विभाग में पदोन्नति की राह में सबसे बड़ा रोड़ा विभाग के ही 4 अफसरों के खिलाफ चल रही जांच बनी हुई है। जबलपुर में पदस्थ सहायक आबकारी आयुक्त संजीव दुबे का नाम उन अफसरों में शामिल है जो विवादों में हैं। इंदौर में 68 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच के घेरे में आने के बाद चर्चा है कि उन्हें केवल एक या 2 वेतनवृद्धि रोकने जैसे हल्के दंड से नवाजा जा सकता है ताकि उनका प्रमोशन हो सके। इसी तरह भोपाल में पदस्थ सहायक आबकारी आयुक्त वीरेंद्र धाकड़ भी जांच का सामना कर रहे हैं, जिन्हें शिवपुरी में पदस्थ रहने के दौरान दंडित किया गया था। यह मामला विभाग के वरिष्ठ स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
विवादों के कारण टल रहा है प्रमोशन
ग्वालियर मुख्यालय में पदस्थ प्रभारी प्रमोद झा भी विवादों से घिरे हैं। उन पर उज्जैन में 3 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी की वसूली न करने के गंभीर आरोप हैं, जिसकी जांच लोकायुक्त द्वारा की जा रही है। वहीं, इंदौर के ही राजनारायण सोनी पर 4 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी मामले में कार्रवाई चल रही है। इन तमाम घटनाओं के कारण पदोन्नति की लिस्ट जारी करने में देरी हो रही है। विभागीय जानकारों का कहना है कि एक तरफ वे अफसर हैं जो पदोन्नति की आस लगाए बैठे हैं और दूसरी तरफ जांच के दायरे में आए अफसर हैं, जिससे विभाग में टकराव की स्थिति बनी हुई है। इस देरी के कारण एडओ से जिला आबकारी अधिकारी और सहायक आयुक्त से उप आयुक्त के पदों पर होने वाली पदोन्नति प्रक्रिया रुकी हुई है।
