मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने रिकवरी आदेश को किया निरस्त, 90 दिनों में पैसे लौटाने के निर्देश

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले की सुनवाई करते हुए कहा है कि यदि कोई याचिकाकर्ता विधवा महिला है और पूरी तरह से अपनी पारिवारिक पेंशन पर ही निर्भर है, तो ऐसी स्थिति में उससे किसी भी प्रकार की राशि की रिकवरी करना पूरी तरह से अनुचित और गलत है। इस टिप्पणी के साथ ही अदालत ने महिला के खिलाफ जारी किए गए रिकवरी आदेश को तुरंत प्रभाव से निरस्त कर दिया है।
हाई कोर्ट के जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए निर्देश दिए कि यदि विभाग द्वारा महिला की पेंशन से अब तक कोई राशि वसूल की जा चुकी है, तो उसे अगले 90 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता महिला को वापस लौटाया जाए। इस मामले में मंडला निवासी शांति धनगर की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता मोहनलाल शर्मा, शिवम शर्मा और जितेंद्र गर्ग ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा।
वकीलों ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता महिला के पति स्वास्थ्य विभाग में सरकारी कर्मचारी के पद पर कार्यरत थे। उनकी सेवानिवृत्ति के बाद जब उनका निधन हो गया, तो विभाग ने उनकी पारिवारिक पेंशन से राशि की कटौती और रिकवरी करना शुरू कर दिया। वकीलों ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा रफीक मसीह के मामले में दिए गए स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी भी कर्मचारी के रिटायरमेंट के बाद उससे इस तरह की रिकवरी नहीं की जा सकती। दूसरी तरफ, शासकीय अधिवक्ता ने तर्क दिया कि कर्मचारी की मृत्यु के बाद जांच में यह पाया गया था कि उन्हें नियत राशि से अधिक पेंशन का भुगतान किया जा रहा था, इसलिए यह कटौती की जा रही थी। हालांकि, हाई कोर्ट ने सरकार के इस तर्क को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि इस मामले में भी सुप्रीम कोर्ट का रफीक मसीह वाला आदेश पूरी तरह लागू होगा।
