
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की एकल पीठ ने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 13 कर्मचारियों के नियमितीकरण के निलंबन पर रोक लगा दी है। जस्टिस विशाल धगट ने शरद सिंह कौशिक की याचिका पर यह आदेश दिया। वरिष्ठ अधिवक्ता कैलाश चंद्र घिलडियाल और अवधेश कुमार अहिरवार ने बताया कि वैधानिक प्रक्रिया से लाभ दिया गया था, जिसे 14 जुलाई 2026 को कुलगुरु ने निलंबित कर दिया था। हस्तक्षेपकर्ता के अधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने कहा कि जांच समिति की रिपोर्ट तक निलंबन था। शासकीय अधिवक्ता हितेन्द्र सिंह ने भी पक्ष रखा। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को अंडरटेकिंग देनी होगी कि रिपोर्ट विपरीत आने पर वे अंतर राशि वापस करेंगे। मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर से शुरू होने वाले सप्ताह में तय की गई है।
जांच रिपोर्ट पर दारोमदार
यचिकाकर्ताओं ने अपनी नौकरी की स्थिरता और नियमितीकरण को बचाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जहां दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह महत्वपूर्ण अंतरिम राहत प्रदान की गई है। न्यायालय की इस शर्त के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा गठित जांच समिति की आगामी रिपोर्ट इन सभी कर्मचारियों के भविष्य के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाली है।
