
स्थानीय प्रतिभाओं का सम्मान और बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी खास, पिछले साल आई 327 शॉर्ट फिल्मों के बाद अब फीचर फिल्मों की बारी
जबलपुर। जबलपुर में आगामी 24 जून 2026 को वीरांगना रानी दुर्गावती जी के बलिदान दिवस के अवसर पर त्रिशती स्टूडियोज द्वारा वीरांगना महोत्सव के अंतर्गत छठे रानी दुर्गावती इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है। फेस्टिवल के निदेशक अर्जुन राय ने बताया कि इस बार वैश्विक स्तर पर 52 अंतर्राष्ट्रीय फीचर फिल्मों की प्रविष्टियां प्राप्त हुई हैं, जिनकी चयन और अवार्ड प्रक्रिया मुंबई के प्रतिष्ठित निर्देशकों की जूरी द्वारा की जा रही है। इस गरिमामयी समारोह में जहां विभिन्न देशों से आई फिल्मों की भव्य स्क्रीनिंग होगी, वहीं समाज में उल्लेखनीय योगदान देकर शहर का नाम रोशन करने वाली स्थानीय वीरांगनाओं को सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ ही बच्चों द्वारा प्रेरक भाषण, सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुतियां और प्रबुद्धजनों द्वारा रानी दुर्गावती जी के जीवन दर्शन पर आधारित व्याख्यान माला का विशेष आयोजन भी होगा।
वैश्विक पटल पर जबलपुर की नई पहचान
यह आयोजन जबलपुर और संपूर्ण मध्य प्रदेश का पहला अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल है, जिसका मुख्य उद्देश्य वीरांगना रानी दुर्गावती जी की वीरता और शहर के सांस्कृतिक गौरव को विश्व के कोने-कोने तक पहुंचाना है। अब तक दुनिया के लगभग सभी महाद्वीपों के 500 से अधिक फिल्म निर्माता, निर्देशक और कलाकार इस मंच से जुड़ चुके हैं। स्पेन, अर्जेंटीना, कोलंबिया और आर्मेनिया जैसे देशों के प्रमुख समाचार पत्रों में इस फेस्टिवल के माध्यम से जबलपुर का नाम प्रमुखता से प्रकाशित हो चुका है, जिसके चलते कई विदेशी फिल्म निर्माता यहां आने के लिए बेहद उत्सुक हैं।
सिनेमा और पर्यटन के संगम का भविष्य
आयोजन समिति का लक्ष्य आगामी 5 वर्षों में इस फिल्म फेस्टिवल को क्षेत्र के पर्यटन का एक प्रमुख आकर्षण केंद्र बनाना है ताकि स्थानीय फिल्मकारों को वैश्विक सिनेमा की बारीकियों को समझने का सीधा अवसर मिल सके। यह अनूठा फेस्टिवल साल में दो बार आयोजित होता है, जिसमें 24 जून का संस्करण फीचर फिल्मों के लिए और 5 अक्टूबर को रानी दुर्गावती जी के जन्मदिवस पर होने वाला संस्करण शॉर्ट फिल्मों के लिए समर्पित रहता है। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष के शॉर्ट फिल्म संस्करण में रिकॉर्ड 327 प्रविष्टियां आई थीं। इस बार भी फेस्टिवल में बच्चों पर आधारित फिल्मों, महिला निर्देशकों के सिनेमा और स्वतंत्र फिल्म निर्माताओं की कृतियों को विशेष रूप से प्राथमिकता दी जा रही है।
