
जबलपुर। जबलपुर नगर निगम के पूर्व आयुक्त और नरसिंहपुर के पूर्व कलेक्टर आईएएस वेदप्रकाश की मुश्किलें आय से अधिक संपत्ति मामले में बढ़ गई हैं। नरसिंहपुर जिले के करेली निवासी आरटीआई कार्यकर्ता रमाकांत कौरव ने दिसंबर 2021 में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी ईओडब्ल्यू में इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। इसी शिकायत पर संज्ञान लेते हुए जांच एजेंसी ने हाल ही में शिकायतकर्ता को पत्र भेजकर पूर्व अधिकारी की चल-अचल संपत्तियों से जुड़े साक्ष्य और दस्तावेज लेकर भोपाल मुख्यालय तलब किया था। समन मिलने के बाद कौरव ईओडब्ल्यू के दफ्तर पहुंचे और जांच अधिकारी को कथित भ्रष्टाचार से अर्जित संपत्तियों के दस्तावेज सौंपे। इसके साथ ही पूर्व आईएएस के विरुद्ध लोकायुक्त संगठन में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7(ग) के अंतर्गत प्राथमिकी क्रमांक 0255 वर्ष 2022 भी पहले से दर्ज है।
दस्तावेजों की पड़ताल के बाद होगी सख्त वैधानिक कार्रवाई
भोपाल स्थित आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ मुख्यालय में जांच अधिकारियों की टीम शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत फाइलों, राजस्व रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन और जमीन-जायदाद से जुड़े प्रमाणों का गहन परीक्षण कर रही है। शिकायत में सीधे तौर पर यह दावा किया गया है कि प्रशासनिक पदों पर पदस्थ रहने के दौरान वेदप्रकाश ने अपने ज्ञात आय स्रोतों की तुलना में अत्यधिक बेनामी परिसंपत्तियां जुटाई हैं। एजेंसी इस समय सभी अभिलेखों का तकनीकी और वित्तीय विश्लेषण कर रही है ताकि वास्तविक संपत्ति का पता लगाया जा सके। प्रारंभिक परीक्षण की प्रक्रिया पूरी होते ही संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे। एजेंसी के अनुसार साक्ष्यों की पुष्टि होने के बाद ही विधि अनुसार अगली दंडात्मक प्रक्रिया शुरू होगी।
लोकायुक्त प्रकरण के साथ अब नई जांच पर नजर
पूर्व कलेक्टर वेदप्रकाश के सेवाकाल के दौरान लिए गए निर्णयों और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर लोकायुक्त पुलिस की विवेचना भी जारी है। वर्ष 2022 में दर्ज हुई लोकायुक्त की एफआईआर के साथ अब ईओडब्ल्यू की इस तेज सक्रियता से पूर्व नौकरशाह की जवाबदेही तय होना तय माना जा रहा है। शिकायतकर्ता रमाकांत कौरव ने दोनों एजेंसियों से निष्पक्ष पड़ताल कर अनुपातहीन संपत्ति को राजसात करने और कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। प्रशासनिक गलियारों में इस दोहरी जांच के नतीजों को लेकर हलचल तेज हो गई है। ईओडब्ल्यू की आगामी रिपोर्ट पर राज्य शासन की नजरें टिकी हैं।
