सगी बहन से भाई ने किया धोखा, ईओडब्ल्यू ने दर्ज की एफआईआर

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Newzo - News Editor 59 Views
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जबलपुर। भोपाल की आर्थिक अपराध शाखा यानी ईओडब्ल्यू ने जबलपुर के ग्राम सालीवाड़ा में जमीन और पेट्रोल पंप से जुड़े एक बड़े फर्जीवाड़े के मामले में सख्त कदम उठाते हुए सगे भाई सहित दो लोगों पर आपराधिक केस दर्ज किया है। शिकायतकर्ता दीप्ति श्रीवास्तव का आरोप है कि उनके भाई गौरव इंगोले ने अपने साथी धीरज कराड़े के साथ मिलकर पैतृक व्यावसायिक जमीन से उनका नाम हटाने के उद्देश्य से जाली नक्शा और फर्जी दस्तावेज तैयार किए। ईओडब्ल्यू भोपाल ने शुरुआती जांच में इन आरोपों को सही पाते हुए प्राथमिकी क्रमांक 0067/2026 दर्ज की है। दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल से जुड़ी गंभीर कानूनी धाराएं लगाई गई हैं। फिलहाल मामले की पूरी जांच निरीक्षक हरिओम दीक्षित कर रहे हैं।

​संयुक्त जमीन का जाली नक्शा बनाकर नाम हटाने का खेल

​यह पूरा मामला ग्राम सालीवाड़ा स्थित करीब 30,120 वर्गफीट व्यावसायिक जमीन से जुड़ा है। यह जमीन मूल रूप से रविन्द्र राव इंगोले ने खरीदी थी, जिसे बाद में दीप्ति इंगोले और गौरव इंगोले के संयुक्त नाम पर सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किया गया था। इसी जमीन पर पिछले कई वर्षों से रिलायबल ऑटो सर्विस के नाम से इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड का एक पेट्रोल पंप चल रहा था। आरोप है कि वर्ष 2006 में जब पुरानी लीज की अवधि समाप्त हो गई, तब गौरव इंगोले ने अपनी बहन की बिना किसी सहमति के एक फर्जी नक्शा बनवा लिया। इस नक्शे में जमीन का हिस्सा अलग दिखाकर शिकायतकर्ता का नाम गायब कर दिया गया।

​उप-पंजीयक कार्यालय में फर्जी दस्तावेजों से लीज का नवीनीकरण

​आरोपी ने इसी कथित फर्जी नक्शे को नई लीज डीड के साथ जोड़कर उप-पंजीयक कार्यालय में पंजीकृत करा लिया। इस फर्जीवाड़े के सहारे पेट्रोल पंप की डीलरशिप का नवीनीकरण भी करा लिया गया। ईओडब्ल्यू की जांच के दौरान जब तहसील कार्यालय और ग्राम पंचायत से रिकॉर्ड मांगे गए, तो मामला और गंभीर हो गया। सरकारी कागजातों की छानबीन में कहीं भी जमीन के किसी कानूनी बंटवारे या बटान का कोई जिक्र नहीं मिला। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार आज भी यह पूरी जमीन संयुक्त रूप से दीप्ति श्रीवास्तव और गौरव इंगोले के नाम पर ही दर्ज है। शिकायतकर्ता को कई वर्षों से जमीन के किराए और पेट्रोल पंप के संचालन से होने वाली कमाई से पूरी तरह अलग रखा गया, जिससे उन्हें बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है।

​अन्य पैतृक संपत्तियों और अधिकारियों की भूमिका की जांच तेज

​इस मामले का दायरा अब काफी बढ़ गया है क्योंकि शिकायत में कुछ अन्य पैतृक संपत्तियों तथा एक दूसरे पेट्रोल पंप से जुड़े फर्जी नामांतरण के आरोप भी सामने आए हैं। ईओडब्ल्यू को शक है कि इस पूरे खेल में कुछ राजस्व विभाग के अधिकारियों और पेट्रोलियम कंपनियों के अफसरों की मिलीभगत भी हो सकती है। जांच एजेंसी अब इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि इन कथित फर्जी कागजातों का रजिस्ट्रेशन कैसे हो गया और किन सरकारी कर्मचारियों या अधिकारियों ने इस पूरी गलत प्रक्रिया को अपनी मंजूरी दी थी। जांच एजेंसी ने साफ संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में कुछ और लोगों को भी इस केस में आरोपी बनाया जा सकता है।

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