
जबलपुर। जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के माध्यम से प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के नाम मध्यप्रदेश लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संघ के नेतृत्व में एक ज्ञापन सौंपा गया जिसमें प्रदेशभर के स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालयों के कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान की मांग उठाई गई और इस अवसर पर संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र तिवारी सहित अजय दुबे, सुनील इशरानी, मंजू पटेल, रमेश उपाध्याय, साहिल सिद्दीकी, घनश्याम पटेल, संताराम सरावी, गोपाल नेमा, दिलीप श्रीवास्तव, विपिन पीपरे, संदीप पाण्डेय, रोहित, ओम पराशर, विनोद सिंह, केशव मैथिल, कौशल अंश चौहान, पार्वती सिंह, विशाल डेहर, संजय, प्रेमलाल वर्मा, मुलायम सिंह बरकड़े, अरुण साहू, गीता एवं मोनिका प्रजापति सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे।
यूनिक एम्प्लॉयी कोड और समयमान वेतन की मांग
ज्ञापन के माध्यम से यह बात प्रमुखता से रखी गई कि सभी स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालयों के कर्मचारियों को तत्काल यूनिक एम्प्लॉयी कोड जारी किया जाना बेहद आवश्यक है ताकि सेवा पुस्तिका, वेतन, अवकाश, पदोन्नति, स्थानांतरण, पेंशन और अन्य प्रशासनिक कार्यों का समयबद्ध तरीके से निपटारा हो सके। इसके साथ ही शासन के निर्धारित नियमों के अनुसार 5 वर्ष और 10 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके पात्र कर्मचारियों को समयमान वेतनमान का लाभ दिए जाने की मांग भी की गई है। कर्मचारियों की मृत्यु या सेवानिवृत्ति के बाद समय पर ग्रेच्युटी का भुगतान मिलने की बात भी ज्ञापन में शामिल है। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत अस्पतालों में तैनात नोडल अधिकारियों तथा सुपरवाइजरों के लिए रोटेशन संबंधी आदेशों का सही क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई ताकि किसी एक कर्मचारी पर अत्यधिक मानसिक और शारीरिक दबाव न पड़े। इसके अलावा पैरा मेडिकल और बीएमएलटी विद्यार्थियों को सेंट्रल लैब और ब्लड बैंक के कार्यों से जोड़कर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिए जाने का सुझाव दिया गया है ताकि अस्पतालों में स्टाफ की कमी से आसानी से निपटा जा सके।
मांगें पूरी नहीं होने पर होगा तीव्र विरोध
यदि शासन और प्रशासन स्तर से इन सभी लंबित मांगों का शीघ्र और संतोषजनक समाधान नहीं किया जाता है तो कर्मचारियों को मजबूरन उग्र रुख अपनाना पड़ेगा। संघ ने चेतावनी दी है कि अपनी मांगों को मनवाने के लिए क्रमिक विरोध प्रदर्शन और हड़ताल का रास्ता चुना जाएगा। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार 12 अगस्त 2026 को दो घंटे का सांकेतिक धरना दिया जाएगा जिसके बाद 14 अगस्त 2026 को संबंधित अधिष्ठाता कार्यालय का घेराव किया जाएगा। आंदोलन को और तेज करते हुए 18 अगस्त 2026, 19 अगस्त 2026 तथा 20 अगस्त 2026 को कॉलेज के मुख्य द्वार पर दो-दो कर्मचारियों द्वारा सांकेतिक हड़ताल की जाएगी। यदि इसके बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आगामी 07 सितंबर 2026 से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू किया जाएगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
