डिंडौरी के किसानों को खेती के लिए मिलेगा बिना ब्याज का ऋण, विशेष अभियान जारी

Newzo
Newzo - News Editor
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डिंडौरी। जिले में किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और उन्हें खेती-किसानी के लिए आसान ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक विशेष किसान क्रेडिट कार्ड अभियान चलाया जा रहा है। मध्यप्रदेश शासन के आयुक्त एवं पंजीयक सहकारी संस्थाएं भोपाल के निर्देशों के तहत और डिंडौरी कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया के मार्गदर्शन में इस अभियान को गति दी जा रही है। जिला प्रशासन ने इस अभियान के माध्यम से क्षेत्र की 44 सहकारी समितियों के सहयोग से ग्रामीण इलाकों में विशेष शिविरों का आयोजन शुरू किया है। इस पूरे अभियान का मुख्य लक्ष्य जिले के 27 हजार पात्र भूमिधारी किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड जारी कर उन्हें शून्य प्रतिशत ब्याज पर अल्पकालीन फसल ऋण का सीधा लाभ पहुंचाना है।

​ग्रामीण क्षेत्रों में शिविरों का आयोजन

​सहकारी समितियों के कर्मचारी और अधिकारी इस अभियान के तहत सीधे ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं। वहां वे उन पात्र किसानों से संपर्क कर रहे हैं जिनके पास अब तक किसान क्रेडिट कार्ड नहीं है। शिविरों के माध्यम से किसानों को सहकारी समिति का सदस्य बनाने की प्रक्रिया को सरल किया गया है। यह विशेष अभियान 14 अप्रैल से शुरू हुआ है और 30 जून 2026 तक निरंतर जारी रहेगा ताकि कोई भी पात्र किसान इस योजना के लाभ से वंचित न रह सके।

​सदस्यता व आवेदन की वर्तमान स्थिति

​अभियान के अंतर्गत अब तक हुए कार्यों के आंकड़े भी सामने आए हैं। 28 मई 2026 तक मिली जानकारी के मुताबिक जिले में 7 हजार 619 किसानों ने समिति की सदस्यता के लिए अपने आवेदन जमा कर दिए हैं। इन प्राप्त आवेदनों में से 1 हजार 212 किसानों ने अपनी सदस्यता शुल्क जमा करने की प्रक्रिया को पूरा कर लिया है, जिसके बाद उनके किसान क्रेडिट कार्ड बनाने की आगे की कार्रवाई पूरी की जा चुकी है। शेष आवेदनों पर भी तेजी से काम किया जा रहा है।

​शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण की सुविधा

​इस योजना के तहत जिन किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड बन रहे हैं, उन्हें सहकारी समितियों के माध्यम से दो रूपों में ऋण की सुविधा मिलती है। किसानों को खेती की जरूरतों के लिए नगद राशि दी जाती है और इसके साथ ही उन्नत खाद तथा बीज भी ऋण के रूप में उपलब्ध कराए जाते हैं। शासन की इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस अल्पकालीन फसल ऋण पर किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज देना होता है। इस पूरी व्यवस्था की नियमित समीक्षा सहायक आयुक्त सहकारिता और जिला सहकारी बैंक के अधिकारियों द्वारा की जा रही है।

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