दतिया फैक्टर:पार्टी से ज्यादा नेताओं को तवज्जो देने वाले भाजपा के जिलाध्यक्ष नपेंगे

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Newzo - News Editor 121 Views
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जबलपुर। दतिया में हुए उप चुनाव के बाद टिकट वितरण को लेकर मचे भारी बवाल और कई पदाधिकारियों के इस्तीफे के बाद अब भारतीय जनता पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व बेहद सख्त रुख अपना चुका है। पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि संगठन से ऊपर किसी भी व्यक्ति या नेता को नहीं रखा जाएगा और अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी कड़ी में अब मंत्रियों, सांसदों और विधायकों की सिफारिश पर बने लगभग 12 ऐसे जिला अध्यक्षों की कार्यशैली और कामकाज की उच्च स्तर पर गहन जांच शुरू हो चुकी है जिनकी निष्ठा संगठन के प्रति कम और किसी खास नेता के प्रति ज्यादा मानी जा रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में इन सभी लापरवाह और सिफारिशी पदाधिकारियों को उनके पदों से हटाया जा सकता है ताकि संगठन की छवि को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।

गुटबाजी और मनमानी की पोल खुली

​दतिया के इस पूरे घटनाक्रम ने प्रदेश स्तर पर पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी और मनमाने फैसलों की पोल खोलकर रख दी है। चुनाव के दौरान जिस तरह से जिला संगठन के कई पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से अपने पदों से इस्तीफे दिए और सड़कों पर उतरकर खुला विरोध प्रदर्शन किया, उसे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखा है। इस घटना के बाद से ही केंद्रीय नेतृत्व ने पूरे प्रदेश के संगठनात्मक जिलों की कार्यप्रणाली की व्यापक समीक्षा करने का बड़ा फैसला लिया है। आने वाले समय में होने वाली बैठकों में यह साफ परखा जाएगा कि किस जिला अध्यक्ष का झुकाव संगठन के संविधान के प्रति है और किसका झुकाव किसी व्यक्तिगत नेता के प्रभाव में है।

कई जिलाध्यक्ष विधायकों की करीबी

​पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने भी इस बात पर गहरी चिंता जताई है कि कई जिलों में संगठन की कमान सीधे तौर पर मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के करीबियों के हाथों में सौंप दी गई है। यदि ऐसा कोई भी संबंधित नेता कमजोर पड़ता है तो उसका सीधा असर पूरे संगठन की कार्यप्रणाली पर पड़ता है। इस समस्या से स्थाई रूप से निपटने के लिए अब भाजपा संगठन को व्यक्ति आधारित व्यवस्था से पूरी तरह मुक्त करके संगठन आधारित प्रणाली की दिशा में आगे बढ़ा रही है। निकाय चुनावों से ठीक पहले इस तरह के सख्त संगठनात्मक बदलाव बेहद जरूरी माने जा रहे हैं ताकि कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊंचा रहे और पार्टी की वैचारिक नीति पर मजबूती से काम किया जा सके।

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