वर्दी पर भारी पड़ा भ्रष्टाचार: कटनी जमीन घोटाले में निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया की अग्रिम जमानत नामंजूर

Newzo
Newzo - News Editor 59 Views
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कटनी/जबलपुर। चर्चित जमीन सौदे, पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार मामले की मुख्य आरोपी निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया को एडीजे कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने शनिवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उनकी अग्रिम जमानत याचिका पूरी तरह खारिज कर दी। गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने यह अर्जी लगाई थी। इस मामले में मुख्य आरोपी अधिकारी सहित उनके सहयोगी फाइनेंसर क्षितिज राज बारापात्रे और कागजी खरीदार मारूफ अहमद हनफी केस दर्ज होते ही फरार चल रहे हैं। पुलिस ने इन तीनों फरार आरोपियों पर 10-10 हजार रुपये का नकद इनाम घोषित किया है। एसआईटी की विशेष टीम लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।

​अदालत ने खारिज की अग्रिम राहत की मांग

​इस संवेदनशील प्रकरण में कानूनी राहत पाने के लिए मुख्य आरोपी की तरफ से न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया था। इससे पूर्व 25 अगस्त को मंगलवार के दिन इस संबंध पर पहली सुनवाई हुई थी, जिसमें अंतिम निर्णय नहीं निकल सका था। तब अदालत ने अग्रिम आदेश के लिए 29 अगस्त की तारीख तय कर दी थी। नियत तिथि पर अभियोजन और बचाव पक्ष के वकीलों ने अपने-अपने कानूनी तर्क पेश किए। न्यायाधीश ने अपराध की गंभीरता और प्रारंभिक साक्ष्यों का अवलोकन करते हुए याचिका को नामंजूर कर दिया।

​साजिश में शामिल तीन मददगारों की तलाश जारी

​गैरकानूनी तरीके से जमीन हथियाने के इस पूरे नेटवर्क में पुलिस महकमे के आला अधिकारी के अलावा निजी क्षेत्र के सिंडिकेट की सीधी भूमिका उजागर हुई है। जांच एजेंसी ने आधिकारिक रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल के बाद तीनों आरोपियों को नामजद किया था। फरारी के चलते कानूनी शिकंजा कसने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों ने विशेष जांच दल को कार्रवाई की पूरी कमान सौंप दी है। आसपास के जिलों और संभावित शरणस्थलों पर पुलिस का गुप्त नेटवर्क सक्रिय है ताकि जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित हो सके।

​हत्या के आरोपी को लाभ देकर सस्ते में कराई रजिस्ट्री

​मामले की जड़ में एक गंभीर आपराधिक प्रकरण के मुल्जिम को गैरकानूनी रियायत पहुंचाने का खेल शामिल था। तय प्रक्रिया के तहत 90 दिनों की समय सीमा के भीतर चालान न्यायालय में दाखिल नहीं होने दिया गया, जिसके चलते हत्या के अभियुक्त को अनिवार्य कानूनी प्रावधानों का लाभ उठाकर जेल से रिहाई मिल गई। इस मदद के बदले में बाजार दर पर 1 करोड़ 7 लाख रुपये मूल्य की बेशकीमती भूमि को मिलीभगत करके महज 18 लाख रुपये के कागजी मूल्य पर करीबियों के नाम दर्ज करा लिया गया।

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