जीएसटी 2.0 के दावों की खुली पोल, प्रदेश में फ्यूल चार्ज घटाने के बजाय 4.59 फीसदी तक वसूला

जबलपुर। प्रदेश में 22 सितंबर 2025 से लागू जीएसटी सुधारों 2.0 के बाद उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली देने का सरकारी दावा कागजी साबित हुआ है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे, रजत भार्गव, एड. वेदप्रकाश अधौलिया, मनीष शर्मा, सुशीला कनौजिया, गीता पांडे, यशवंत कोष्टा, अशोक यादव और श्याम सोलंकी ने विद्युत नियामक आयोग को ईमेल भेजकर विरोध दर्ज कराया है। मंच के प्रतिनिधियों का कहना है कि सरकार ने कोयले पर जीएसटी 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत की थी, जबकि 400 रुपया प्रति टन का कम्पेन्सेशन सेस पूरी तरह खत्म कर दिया था। इस बदलाव से कोयला सस्ता होने के कारण फ्यूल चार्ज में कमी लाकर बिजली 22 पैसे प्रति यूनिट सस्ती करने का वादा किया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट निकली।
आठ महीनों के आंकड़ों ने उजागर की कड़वी सच्चाई
मंच द्वारा जारी पिछले 8 महीनों के फ्यूल चार्ज विश्लेषण से यह बात सामने आई है कि उपभोक्ताओं को राहत मिलने के बजाय उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ डाला गया। तकनीकी आकलन के अनुसार यह दर माइनस या 1 प्रतिशत के इर्द-गिर्द रहनी चाहिए थी, लेकिन इसका वास्तविक औसत 3.32 प्रतिशत दर्ज किया गया। जनवरी 2026 में फ्यूल चार्ज 1.58 प्रतिशत निर्धारित हुआ था। फरवरी 2026 में यह घटकर माइनस 1.71 प्रतिशत और मार्च 2026 में माइनस 0.63 प्रतिशत रहा। इसके बाद अप्रैल 2026 में यह उछलकर 5.36 प्रतिशत तक पहुंच गया। मई 2026 में 3.91 प्रतिशत, जून 2026 में 1.11 प्रतिशत, जुलाई 2026 में 3.77 प्रतिशत तथा अगस्त 2026 में 4.59 प्रतिशत की भारी वसूली की गई। लगातार बढ़ते इस अधिभार से प्रदेश भर के बिजली उपभोक्ताओं में गहरा असंतोष पनप रहा है। मंच के सभी पदाधिकारियों ने नियामक आयोग से तत्काल हस्तक्षेप कर नियमों के तहत वास्तविक राहत दिलाने की मांग की है।
