बड़े नेताओं के करीबियों की मौजूदगी पर पुराने कार्यकर्ताओं ने जताई आपत्ति

जबलपुर। भारतीय जनता पार्टी के हालिया संगठनात्मक प्रशिक्षण वर्ग में इस बार वैचारिक चर्चाओं से अधिक ध्यान विशेष मेहमानों के प्रवेश और लग्जरी व्यवस्थाओं ने खींचा। संगठन के भीतर सादगी का संदेश देने वाले इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में कुछ ऐसे चेहरे पूरे समय सक्रिय दिखाई दिए, जिन्हें आधिकारिक आमंत्रण सूची में शामिल ही नहीं किया गया था। इस अप्रत्याशित उपस्थिति के कारण कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भी भाजपा संगठन के अंदर दबी जुबान में गंभीर चर्चाओं का दौर चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक इस आयोजन में केवल चयनित पदाधिकारियों, मंडल प्रभारियों और अधिकृत कार्यकर्ताओं को ही आमंत्रित किया गया था। इसके बावजूद कुछ भाजपा नेताओं और अन्य कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने सबको चौंका दिया। कार्यक्रम स्थल पर इन चेहरों की अति-सक्रियता को लेकर कई समर्पित कार्यकर्ताओं ने मौके पर ही आपत्ति जताई थी, परंतु जिम्मेदार पदाधिकारियों ने इस पूरे मामले पर पूरी तरह चुप्पी साधे रखी। कार्यकर्ताओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि जब प्रवेश के कड़े नियम तय थे, तो कुछ चुनिंदा लोगों को विशेष अनुमति किस आधार पर दी गई।
बंद कमरे के आयोजन में फैला असंतोष
प्रशिक्षण वर्ग के दौरान भाजपा नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर के करीबी माने जाने वाले कुछ कार्यकर्ताओं की मौजूदगी को लेकर कार्यक्रम स्थल पर लगातार कानाफूसी होती रही। संगठन के कई पुराने और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का साफ कहना था कि यदि भाजपा के आंतरिक व नीतिगत कार्यक्रमों में भी इस तरह की विशेष कृपा का दौर शुरू हो जाएगा, तो जमीन पर रात-दिन काम करने वाले समर्पित कार्यकर्ताओं का मनोबल पूरी तरह टूट जाएगा। अनुशासन के लिए जानी जाने वाली पार्टी में इस तरह का पक्षपात कार्यकर्ताओं को रास नहीं आ रहा है।
सादगी के पारंपरिक मंच पर आधुनिक तामझाम की चर्चा
भारतीय जनता पार्टी के प्रशिक्षण वर्ग हमेशा से अपनी सादगी, कठोर अनुशासन और वैचारिक मंथन के लिए पहचाने जाते रहे हैं। इसके विपरीत इस बार के जबलपुर आयोजन में दिखाई गई अत्यधिक आधुनिक और विशेष व्यवस्थाओं ने सामान्य कार्यकर्ताओं को हैरान कर दिया। अंदरखाने से मिल रही खबरों के अनुसार कुछ खास लोगों के लिए अलग स्तर की सुविधाएं और विशेष इंतजाम किए गए थे। पुराने नेताओं का मानना है कि भाजपा की वास्तविक पहचान हमेशा से जमीन से जुड़े संगठन की रही है, ऐसे में इतना अत्यधिक तामझाम संगठन की मूल कार्यशैली और सिद्धांतों से मेल नहीं खाता।
आंतरिक प्रोटोकॉल और पारदर्शिता के गहरे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद अब भाजपा संगठन के भीतर पारदर्शिता को लेकर कई तरह के सवाल खड़े होने लगे हैं। कार्यकर्ता यह पूछ रहे हैं कि क्या पार्टी के आंतरिक कार्यक्रमों में प्रोटोकॉल और अनुशासन के नियम सभी सदस्यों पर समान रूप से लागू होते हैं या कुछ लोगों को इसमें छूट मिलती है। हालांकि किसी भी वरिष्ठ पदाधिकारी ने अभी तक इस पूरे विवाद पर खुलकर अपना पक्ष सामने नहीं रखा है, लेकिन इस समय शहर के राजनीतिक गलियारों में प्रशिक्षण वर्ग की चर्चा वैचारिक सत्रों से ज्यादा वीआईपी एंट्री और विशेष व्यवस्थाओं को लेकर हो रही है।
