
शहडोल। मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में एक बेहद चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है। शहडोल जिले के जयसिंहनगर विकासखंड के उफरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ तथाकथित डॉक्टर महेश चंद शर्मा ने सिस्टम को धता बताते हुए एक साथ तीन जिलों में नौकरी की और सरकारी खजाने को 64 लाख रुपये का चूना लगाया। यह व्यक्ति शहडोल, खरगोन और श्योपुर में एक ही समय में कार्यरत था और अलग-अलग कर्मचारी आईडी व दस्तावेजों का उपयोग कर वेतन उठा रहा था। रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद इस फर्जीवाड़े की परतें खुलीं, तो विभाग के अधिकारी भी दंग रह गए। उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी की सेवा समाप्त करने, एफआईआर दर्ज कराने और वेतन की रिकवरी के निर्देश दिए हैं। अब उन अधिकारियों पर भी गाज गिरना तय है, जिनकी लापरवाही से यह भ्रष्टाचार वर्षों तक चलता रहा।
तीन जिलों में एक साथ सेवा का खेल
आरोपी महेश चंद शर्मा ने शातिराना तरीके से हर जिले में अलग-अलग दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। उसने श्योपुर में 1 जून 2021 को जॉइनिंग ली, जहाँ उसकी एम्प्लॉई आईडी एनएचएम 281676 और पैन नंबर ओइटीपीएस 6180 ई है। खरगोन में उसने 14 फरवरी 2023 को नियुक्ति ली, जिसकी आईडी एनएचएम 326860 और पैन नंबर आइबीएपीएम 7895 जी है। वहीं, शहडोल में उसने 9 फरवरी 2024 को जॉइनिंग की, जहाँ उसकी आईडी एनएचएम 331906 और पैन नंबर सीवायडब्ल्यूपीसी 6248 एल दर्ज है। इन अलग-अलग पहचानों के कारण एनएचएम और स्वास्थ्य विभाग की जांच प्रणाली उसे पकड़ने में नाकाम रही। उसने अपनी तिकड़म से तीनों जिलों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और लंबे समय तक सरकारी वेतन का लाभ उठाता रहा।
सार्थक ऐप का दुरुपयोग कर घर बैठे हाजिरी
आरोपी की कार्यशैली बेहद संदिग्ध थी और वह उफरी स्वास्थ्य केंद्र में शायद ही कभी उपस्थित होता था। वह तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर सार्थक ऐप के माध्यम से अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कर लेता था। कई बार वह प्रदेश की सीमा से बाहर रहकर भी हाजिरी लगा देता था। ब्लॉक और जिला स्तर के अधिकारियों द्वारा किए गए औचक निरीक्षणों में वह बार-बार अनुपस्थित मिला, जिसके चलते उसे नोटिस भी जारी किए गए थे। बावजूद इसके विभाग के भीतर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिससे उसका मनोबल बढ़ता गया। उसके इस कृत्य ने स्वास्थ्य विभाग की ऑनलाइन मॉनिटरिंग और सत्यापन प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि इतनी बड़ी अनियमितता लंबे समय तक फाइलों में दबी रही।
लाखों रुपये के सरकारी वेतन का हुआ भुगतान
इस फर्जीवाड़े में आर्थिक नुकसान का आंकड़ा काफी बड़ा है। आरोपी को तीनों जिलों से प्रतिमाह लगभग 50 से 55 हजार रुपये का मानदेय मिल रहा था। श्योपुर से उसने 30 लाख रुपये, खरगोन से 20 लाख रुपये और शहडोल से 14 लाख रुपये का भुगतान प्राप्त किया। कुल मिलाकर उसने 64 लाख रुपये की राशि गलत तरीके से हासिल की। स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने साफ कर दिया है कि केवल आरोपी डॉक्टर ही नहीं, बल्कि उस नियुक्ति प्रक्रिया और सत्यापन में शामिल अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी। अब पूरे मामले की सघन जांच के निर्देश दिए गए हैं ताकि यह पता चल सके कि आखिर किसकी मिलीभगत से एक व्यक्ति तीन स्थानों पर एक साथ वेतन लेने में सफल रहा।
दोषी अधिकारियों और डॉक्टर पर होगी कार्रवाई
सरकार अब इस पूरे प्रकरण को लेकर सख्त रुख अपना चुकी है। मंत्री ने निर्देश दिए हैं कि आरोपी डॉक्टर से पूरी राशि की वसूली की जाए। साथ ही, उन सभी संबंधित अधिकारियों पर भी कार्यवाही की जाएगी जिन्होंने समय रहते इन अनियमितताओं की जानकारी उच्च अधिकारियों को नहीं दी। यह मामला प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। अब विभाग अपनी भर्ती प्रक्रियाओं और दस्तावेजों के सत्यापन के नियमों को और अधिक कड़ा करने की तैयारी कर रहा है। जनता के टैक्स के पैसों की हुई इस बर्बादी के बाद अब शासन का ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति न हो और सिस्टम में पारदर्शिता पूरी तरह बहाल की जा सके।
