
जबलपुर। आयुष्मान भारत योजना के तहत डायलिसिस कराने वाले मरीजों को सरकार ने बड़ी राहत दी है। नए पैकेज सिस्टम के तहत अब मरीजों का सत्यापन बार-बार थंब इंप्रेशन के बजाय केवल फोटो के आधार पर किया जा सकेगा। इससे मरीजों को अस्पताल में 8 घंटे तक रुकने की परेशानी से मुक्ति मिलेगी। राज्य सरकार ने इस व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है, जिससे मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डायलिसिस कराने वाले 56 हजार लोगों को सीधा फायदा होगा। रिपोर्ट के अनुसार अकेले जबलपुर जिले में हर महीने 5000 मरीजों को डायलिसिस की जरूरत पड़ती है, जिसके लिए सरकारी अस्पतालों सहित करीब प्राइवेट सेंटर मौजूद हैं, जहां लगभग 80% मरीज आयुष्मान योजना के तहत ही इलाज कराते हैं। अब इस व्यवस्था को जबलपुर सहित पूरे प्रदेश में लागू करने के लिए अस्पतालों में जांच-पड़ताल शुरू की जाएगी ताकि आदेश का सही पालन हो सके।
बायोमेट्रिक झंझट खत्म और फोटो से तुरंत अप्रूवल
अभी तक चल रही पुरानी प्रक्रिया के कारण डायलिसिस मरीजों को सप्ताह में दो से तीन बार अस्पताल आना पड़ता था। इलाज के दौरान मरीजों को अलग-अलग चरणों में चार बार थंब इंप्रेशन यानी बायोमेट्रिक सत्यापन देना पड़ता था। इसमें रजिस्ट्रेशन के पहले थंब इंप्रेशन से लेकर आखिरी थंब इंप्रेशन के बीच पूरे 8 घंटे का समय लग जाता था। कई बार थंब मैच नहीं होने पर मरीजों को डायलिसिस के बाद दोबारा अस्पताल बुलाया जाता था, जिससे मरीजों को या तो सेंटर पर ही रुकना पड़ता था या घर से वापस आना पड़ता था। अब नई व्यवस्था में सिर्फ डायलिसिस के दौरान मरीज की फोटो खींचकर उसे आयुष्मान पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा और इसी फोटो के आधार पर मरीज का अप्रूवल तुरंत आ जाएगा।
सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए गोल्डन ऑवर पैकेज
इस नए बदलाव में डायलिसिस के साथ-साथ आयुष्मान योजना में पहली बार सड़क दुर्घटना पीड़ितों को भी शामिल किया गया है। इसके लिए एक विशेष गोल्डन ऑवर पैकेज जोड़ा गया है। हादसे के बाद शुरुआती एक घंटे के भीतर दी जाने वाली सभी प्रकार की आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को इस पैकेज के दायरे में रखा गया है। इससे दुर्घटना के समय गंभीर मरीजों को बिना किसी देरी के तुरंत और मुफ्त इलाज मिल सकेगा, जिससे उनकी जान बचाई जा सकेगी।
झुलसे मरीजों के इलाज के लिए नए वित्तीय पैकेज
गंभीर रूप से झुलसे हुए मरीजों के लिए भी सरकार ने पूरी तरह से नई नीति तय की है। अब शरीर के जलने के प्रतिशत के आधार पर अलग-अलग वित्तीय पैकेज निर्धारित किए गए हैं। इसके तहत 25 से 40 प्रतिशत तक जलने पर 27,750 रुपए का पैकेज मिलेगा। वहीं, अगर मरीज 60 से 80 प्रतिशत तक झुलस जाता है, तो उसके इलाज के लिए 67,200 रुपए तक का पैकेज दिया जाएगा, जिससे गरीब परिवारों पर इलाज का आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
