
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने कटनी के चर्चित बहुचर्चित भूमि विवाद, गंभीर जालसाजी और पद के दुरुपयोग से जुड़े आपराधिक मामले में निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया की याचिका पर लंबी सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। याचिका में दर्ज एफआईआर को निरस्त करने और किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से फौरी सुरक्षा देने की गुहार लगाई गई थी। अदालत में राज्य सरकार की तरफ से पेश हुए शासकीय अधिवक्ता ने राहत का कड़ा विरोध दर्ज कराया। अभियोजन ने अपने तर्कों के समर्थन में जांच के दौरान कलमबद्ध किए गए पुलिसकर्मियों के बयानों को सामने रखते हुए स्पष्ट किया कि इस पूरे प्रकरण के सह-अभियुक्त क्षितिज राज बारापात्रे और निलंबित अधिकारी एक ही मकान में पति-पत्नी की हैसियत से साथ निवास कर रहे थे। इस दौरान यह बात भी रिकॉर्ड पर लाई गई कि अधीनस्थ आरक्षक मोंटू अधिकारी के आवास पर रोजमर्रा का राशन एवं घरेलू सामग्री पहुंचाने का काम संभालता था, जिसका संपूर्ण वित्तीय भुगतान सह-अभियुक्त द्वारा अदा किया जाता था।
घरेलू तालमेल छिपाकर विदेश भागने की रची योजना
अभियोजन ने अदालत को अवगत कराया कि अधीनस्थ न्यायालय में पूर्व में लगाई गई अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई में दोनों ही आरोपियों ने परस्पर पहचान से साफ मुकरते हुए स्वयं को अजनबी बताया था। इसके उलट निलंबित अधिकारी ने अपने बचाव में वैवाहिक संबंध पूरी तरह टूटने तथा अपनी 2 मासूम बेटियों के भरण-पोषण व देखरेख की पारिवारिक दुहाई दी थी, किंतु प्रथम अदालत ने दोनों के बीच के पुख्ता निजी संबंधों एवं गंभीर आरोपों को आधार बनाकर राहत खारिज कर दी थी। उच्च न्यायालय में याचिकाकर्ता की पैरवी करते हुए उनके अधिवक्ता ने दावा किया कि दर्ज प्राथमिक सूचना रिपोर्ट में उनकी कोई सीधी भागीदारी या स्पष्ट भूमिका सामने नहीं आई है, उन्हें प्रशासनिक द्वेषवश झूठे आधारों पर घेरा गया है। उधर, शासन ने तीखा पलटवार करते हुए साक्ष्य प्रस्तुत किए कि जेल की सलाखों के पीछे बंद कत्ल के एक संदेही को अनुचित रियायत पहुंचाने के मकसद से अदालत में समय पर अभियोग पत्र नहीं दाखिल किया गया।
धमकियों और हमले के आरोपों बीच फैसला लंबित
सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि असहाय पीड़ित पक्ष को आतंकित करके उनकी बेशकीमती अचल संपत्ति को नियमविरुद्ध तरीके से हड़पने की सोची-समझी साजिश रची गई। आपराधिक मामला कायम होने के तत्काल बाद से ही अधिकारी पुलिस की पहुंच से दूर हैं, जिसे देखते हुए अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने की आशंका पर एयरपोर्ट्स के लिए लुक आउट सर्कुलर पहले ही जारी किया जा चुका है। न्यायिक कार्यवाही के दौरान परिवादी की तरफ से वर्चुअल रूप से जुड़े वकील अवनीश तिवारी ने अपनी जान पर गंभीर संकट होने की गुहार लगाई। उन्होंने मंच पर कहा कि केस की पैरवी करने पर लगातार धमकियां दी जा रही हैं और 11 सितंबर के आस-पास भारी वाहन से कुचलकर जान लेने की प्रत्यक्ष साजिश की गई। पीठ ने इस शिकायत पर कोई भी कानूनी संज्ञान लेने से पूर्व अधिवक्ता को निर्धारित नियम से अपना औपचारिक वकालतनामा पटल पर पेश करने का आदेश दिया, जिसके उपरांत दोनों पक्षों की बहस सुनकर न्यायालय ने आगामी आदेश सुरक्षित कर लिया।
