
जबलपुर । पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल अंतर्गत रेलवे मजदूर संघ में चंदा और सदस्यता शुल्क के नाम पर चल रही कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर प्रकरण में रेल प्रशासन ने आधिकारिक जांच प्रक्रिया आरंभ करते हुए पिछले दिनों गंगापुर निवासी शिकायतकर्ता के विस्तृत बयान दर्ज किए हैं। पूर्व शाखा पदाधिकारी और उनके एक सहयोगी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हेतु प्रधानमंत्री, रेल मंत्री, श्रम एवं रोजगार मंत्री, लोकपाल, रेलवे बोर्ड अध्यक्ष सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा पंजीयक व्यावसायिक संघ को पत्र भेजा था। इसके बाद शीर्ष स्तर से मिले निर्देशों पर कोटा मंडल रेल प्रशासन हरकत में आया, जबकि लोकपाल के पास पहुंची अर्जी को अग्रिम कार्रवाई के लिए पश्चिम मध्य रेलवे जबलपुर मुख्यालय की सतर्कता शाखा यानी विजिलेंस को स्थानांतरित कर दिया गया है। सतर्कता विभाग भी शीघ्र ही पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच पड़ताल कर अपनी रिपोर्ट लोकपाल को सौंपने की तैयारी में जुटा है। शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचे इस मामले से यूनियन गलियारे में हड़कंप मच गया है।
दस हजार कर्मियों से जुटाते एक करोड़ रुपए
कोटा मंडल में कार्यरत करीब 10000 रेल कर्मचारियों से यूनियन द्वारा प्रतिवर्ष सदस्यता शुल्क के साथ-साथ बोनस के समय विशेष संग्रह किया जाता है, जिससे कुल जमा राशि सालाना करीब 1 करोड़ रुपए तक पहुंच जाती है। नियमानुसार 500 रुपए वार्षिक सदस्यता शुल्क शाखा के खाते में जमा होना अनिवार्य है। इस पूरी राशि के बंटवारे का स्पष्ट वित्तीय ढांचा तय है, जिसमें से 45 प्रतिशत हिस्सा केंद्रीय कार्यालय को और 25 प्रतिशत हिस्सा मंडल कार्यालय को भेजा जाना होता है। इसके साथ ही मंडल में प्रतिनियुक्ति की स्थिति होने पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त राशि मंडल कार्यालय को देने का नियम बना हुआ है। इन सभी औपचारिक देयताओं के पश्चात शेष बचा 20 प्रतिशत हिस्सा संबंधित शाखा के कल्याणकारी कार्यों एवं संचालन हेतु मिलना चाहिए।
उन्नीस शाखाओं के बीस लाख का नहीं अता-पता
कोटा मंडल के अधीन कुल 19 शाखाएं संचालित हो रही हैं, जिनका 20 प्रतिशत अंशदान मिलाकर हर साल करीब 20 लाख रुपए बनता है। आरोप है कि वर्ष 2018 से लेकर अब तक यह वैध राशि शाखाओं को कभी हस्तांतरित ही नहीं की गई और यूनियन स्तर पर इसकी सीधी बंदरबांट की जा रही है। पूर्व पदाधिकारियों का कहना है कि जब वे शाखा स्तर पर पद पर कार्यरत थे, तब उन्होंने अपनी स्थानीय शाखा समेत पूरे मंडल के आय-व्यय की बैलेंस शीट और आधिकारिक दस्तावेज देखने की लिखित मांग उठाई थी, जिसे शीर्ष यूनियन नेताओं ने सिरे से दबा दिया। इसी लगातार बरती जा रही गोपनीयता के चलते बड़े आर्थिक गबन का अंदेशा गहरा गया है।
फर्जी बिलों और बैलेंस शीट से हुआ खेल
शिकायत में खुलासे के साथ आशंका जताई गई है कि सभी 19 शाखाओं के नाम से कागजों में मनगढ़ंत व फर्जी बैलेंस शीट तैयार की जाती हैं। इसके तहत शाखाओं के विकास और बैठकों के नाम पर फर्जी बिल और मनमाने खर्च दर्शा दिए जाते हैं, ताकि आवंटित होने वाले 20 लाख रुपए के कोटे का गबन आसानी से किया जा सके। जमीन पर कोई वास्तविक खर्च किए बिना केवल कागजी फाइलों को दुरुस्त कर वर्षों से लाखों रुपए की हेराफेरी को अंजाम दिया जा रहा है। दूसरी ओर, आरोपों के घेरे में आए मजदूर संघ के प्रतिनिधियों ने इन सभी आरोपों को मनगढ़ंत बताते हुए किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी से पूरी तरह साफ इनकार किया है।
