
जबलपुर। रेलवे बोर्ड के निदेशक यूके तिवारी ने 31 अगस्त, 2026 को सभी जोनल महाप्रबंधकों और उत्पादन इकाइयों को दिशा-निर्देश जारी कर स्पष्ट किया कि अनुकंपा पर नियुक्त आश्रित यदि अनिवार्य प्रशिक्षण पास करने में विफल रहते हैं, तो उनकी सेवा सीधे समाप्त नहीं होगी। ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के महामंत्री शिव गोपाल मिश्रा ने इस मुद्दे को बोर्ड के समक्ष जोरदार ढंग से उठाया था, जिसके बाद यह मानवीय निर्णय सामने आया। अब ऐसे आश्रित कर्मियों को डायरेक्ट रिक्रूट्स मास्टर सर्कुलर के तहत दोबारा प्रशिक्षण का मौका मिलेगा। यदि वे फिर भी असफल रहे, तो सेवा समाप्ति के बदले उन्हें योग्यता और मेडिकल मानकों के अनुरूप वैकल्पिक पद देकर रोजगार की पुख्ता सुरक्षा प्रदान की जाएगी।
दोबारा प्रशिक्षण का अवसर और वैकल्पिक पद का लाभ
नए नियमों के अनुसार यदि कोई अनुकंपा कर्मी पहली बार में निर्धारित प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरा नहीं कर पाता है, तो प्रशासन उसे तुरंत बाहर का रास्ता नहीं दिखाएगा। कर्मचारी को अपनी कमियां दूर करने और परीक्षा पास करने का एक और वैधानिक मौका दिया जाएगा। यदि कर्मी दोबारा भी प्रशिक्षण पास करने में असमर्थ रहता है या इस विकल्प को नहीं चुनता, तब भी उसकी बर्खास्तगी अनिवार्य नहीं होगी। सक्षम प्राधिकारी उसे किसी अन्य संवर्ग में पदस्थापित करने पर विचार करेगा। जरूरत पड़ने पर यह नया दायित्व निचले पे-लेवल का भी हो सकता है, ताकि आश्रित परिवार की नियमित आमदनी और आजीविका का साधन किसी भी सूरत में छिनने न पाए।
शैक्षिक योग्यता और मेडिकल फिटनेस जांच की अनिवार्यता
वैकल्पिक पद का आवंटन पूरी तरह प्रशासनिक नियमों और तय अर्हताओं के अधीन रहेगा। संबंधित व्यक्ति के पास नए पद के अनुरूप निर्धारित न्यूनतम शैक्षणिक प्रमाण पत्र होना आवश्यक होगा। इसके अतिरिक्त, रेलवे के संबंधित मेडिकल श्रेणी के स्वास्थ्य परीक्षण में खरा उतरना अनिवार्य रहेगा। नए पद के कार्यभार के लिए उम्मीदवार की उपयुक्तता की विधिवत समीक्षा होगी। यह व्यवस्था उन जरूरतमंद परिवारों के लिए वरदान साबित होगी, जो विषम पारिवारिक परिस्थितियों में नौकरी पाने के बाद केवल तकनीकी या कठिन प्रशिक्षण की वजह से रोजी-रोटी खोने के कगार पर पहुंच जाते थे। कर्मचारी संगठन के प्रयासों से अब ऐसे सभी प्रभावित कर्मियों का भविष्य पूरी तरह महफूज हो गया है।
