
जबलपुर। मध्यप्रदेश राजपत्र में जारी अधिसूचना के बाद जबलपुर मेडिकल विश्वविद्यालय का दायरा घटाकर केवल 4 संभागों तक सीमित कर दिया गया है। राज्यपाल के आदेश पर अतिरिक्त सचिव निरीश खरे द्वारा प्रकाशित इस आदेश से यह संस्थान देश का सबसे छोटा आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय बन गया है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे के अनुसार दो समान हिस्सों में बंटवारे की मांग को लेकर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवीन कोठारी को दी गई अपील खारिज हो गई है। पूर्व अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल से दूरभाष पर चर्चा के बावजूद जबलपुर का पक्ष अनदेखा रहा, जिसके बाद मंच ने इस अधिसूचना को न्यायालय में चुनौती देने का ऐलान किया है।
समान बंटवारे की मांग खारिज कर दी गई
मंच द्वारा राज्यपाल के प्रमुख सचिव को भेजी गई याचिका में स्पष्ट तर्क दिया गया था कि असंतुलित विभाजन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत मिले समानता के अधिकार का सीधा उल्लंघन करता है। इसके अतिरिक्त प्रशासनिक स्तर पर पूर्व अपर मुख्य सचिव से संपर्क साधकर जबलपुर के हितों की रक्षा करने और विसंगतियों को दूर करने का आग्रह किया गया था, परंतु शासन स्तर पर इस पक्ष पर ध्यान दिए बिना प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई।
पूरे देश में कहीं नहीं हुआ ऐसा बंटवारा
संगठन ने यूजीसी और केंद्र सरकार को पत्र प्रेषित कर अवगत कराया है कि पूरे देश के किसी भी अन्य राज्य में मेडिकल यूनिवर्सिटी का इस प्रकार विखंडन नहीं किया गया है। मंच की बैठक में इस नोटिफिकेशन के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक में रजत भार्गव, एडवोकेट वेदप्रकाश अधौलिया, मनीष शर्मा, डॉ. एबी श्रीवास्तव, सुशीला कनौजिया, गीता पांडे और यशवंत कोष्टा उपस्थित रहे।
