
जबलपुर। जिले में मिलावटखोरी पर कड़ा प्रहार करते हुए खाद्य सुरक्षा और राजस्व विभाग के संयुक्त दल ने पाटन और शहपुरा में व्यापक स्तर पर औचक निरीक्षण किया। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देश पर अमानक सामग्री की रोकथाम के लिए यह सघन अभियान चलाया गया। जांच दल ने पाटन स्थित बड्डू स्वीट्स, संदीप खोवा, राजू स्वीट्स, जुगल स्वीट्स और मदन स्वीट्स समेत 5 प्रमुख दुकानों की पड़ताल की, जहां से मावा व मिठाइयों के 7 नमूने जांच के लिए उठाए गए। इसी दौरान एक प्रतिष्ठान से 40 किलोग्राम प्रतिबंधित एनालॉग मिल्क केक जब्त किया गया। इसके पश्चात दल ने शहपुरा के भेड़ाघाट चौराहा स्थित बीकानेर स्वीट्स पर छापा मारकर 4 नमूने लिए तथा सभी विक्रेताओं को गुणवत्ता और स्वच्छता के सख्त निर्देश दिए।
मिलावटी मावे पर प्रशासन की सख्ती
त्योहारी सीजन और आम दिनों में नागरिकों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ रोकने के मकसद से यह सघन तलाशी अभियान शुरू किया गया है। अधिकारियों की टीम जब अचानक बाजारों में पहुंची तो दुकानदारों में हड़कंप मच गया। जांच अधिकारियों ने दुकानों के भंडार गृहों, निर्माण स्थलों और बिक्री काउंटरों की बारीकी से पड़ताल की। मिठाइयों के निर्माण में प्रयुक्त होने वाले कच्चे माल, घी, तेल और खोवे की शुद्धता की प्रारंभिक जांच मौके पर ही की गई। संदेहास्पद पाए गए सभी नमूनों को सील कर राज्य खाद्य प्रयोगशाला में रासायनिक परीक्षण के लिए भेजा जा रहा है। प्रयोगशाला से विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार संबंधित प्रतिष्ठान संचालकों पर वैधानिक धाराएं लगाई जाएंगी। सिंथेटिक और अमानक सामग्रियों का प्रयोग मानव शरीर के लिए बेहद हानिकारक सिद्ध होता है, इसी कारण प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हानिकारक माल को बाजार में बिकने से पहले ही अपने नियंत्रण में ले लिया।
दुकानों में स्वच्छता और शुद्धता रखना अनिवार्य
जांच अभियान के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने व्यापारियों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता, साफ एप्रन, दस्ताने और सिर पर कैप का उपयोग अनिवार्य रूप से करने को कहा गया है। दुकानों में मक्खियों, धूल और कीटाणुओं से बचाव के लिए जालीदार ढक्कन और उचित तापमान पर मिठाइयों को रखने के प्रबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। नकली मावा या कृत्रिम घटकों से निर्मित उत्पादों की बिक्री को कानूनन अपराध बताते हुए व्यापारियों को केवल प्रमाणित सामग्री ही बेचने की ताकीद की गई है। प्रशासनिक दल ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा सर्वोपरि है और भविष्य में भी ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में ऐसे औचक निरीक्षण निरंतर जारी रहेंगे, ताकि उपभोक्ताओं को पूर्णतः सुरक्षित और पौष्टिक उत्पाद मिल सकें।
