
डिंडौरी। जिले की ग्राम पंचायत कसईसोंढा में 2021 की आदिवासी विकास परियोजना वाली सी.सी. सड़क निर्माण में 5.30 लाख रुपए की सरकारी वित्तीय हेराफेरी के मामले में जिला पंचायत सीईओ दिव्यांशु चौधरी ने कड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को जारी फैसले में बकाएदार पूर्व सरपंच नोखेलाल परस्ते को 30 दिन की जेल की सजा सुनाई गई है। पंचायतराज अधिनियम के तहत वसूली आदेशों की लगातार अनदेखी करने पर यह कानूनी फैसला लिया गया। आदेश के तहत आरोपित पूर्व सरपंच को पकड़ने की तिथि से जेल में रखा जाएगा। सजा की अवधि के दौरान उन्हें किस स्थान पर अभिरक्षा में रखा जाए, इस बाबत जिला पंचायत प्रशासन ने पुलिस अधीक्षक को आधिकारिक पत्र भेजकर व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है।
सड़क के बजट में भारी गड़बड़ी पकड़ी गई
भौतिक सत्यापन और तकनीकी रिपोर्ट में पाया गया कि नीचे टोला स्थित प्राथमिक शाला भवन से लेकर अनुसुईया के मकान तक सी.सी. मार्ग तैयार करने का दायित्व सौंपा गया था। इस कार्य के लिए शासन स्तर से 9 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई थी। निर्माण एजेंसी के जिम्मेदारों ने खाते से 7 लाख रुपए का आहरण तो कर लिया, परंतु धरातल पर मात्र 1.70 लाख रुपए की लागत का ही कंक्रीट कार्य कराया। शेष काम अधूरा छोड़ दिया गया। मौके पर हुए वास्तविक मूल्यांकन से साफ हुआ कि पूरी योजना में बड़े पैमाने पर हेरफेर कर जनता के विकास के पैसों की बंदरबांट की गई थी।
रिकवरी आदेश का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई
मध्य प्रदेश पंचायतराज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 89 के तहत जांच पूरी कर वसूली तय की गई थी। प्रकरण में पूर्व सचिव ने अपने हिस्से की आधी देनदारी यानी 2.65 लाख रुपए 14 फरवरी 2025 को सरकारी कोष में जमा करा दिए थे। वहीं पूर्व सरपंच नोखेलाल परस्ते के विरुद्ध धारा 92 में प्रकरण पंजीबद्ध कर वसूली नोटिस थमाए गए। अंतिम सुनवाई के बाद 29 जनवरी 2026 को जारी आदेश में 15 दिन की मोहलत दी गई थी। निर्धारित अवधि बीतने पर भी राशि जमा न करने के कारण कारावास का आदेश जारी कर दिया गया।
