कटनी हत्याकांड मामला: पूर्व सीएसपी नेहा पच्चीसिया को बर्खास्त करने की तैयारी!

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Newzo - News Editor 35 Views
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जबलपुर। कटनी के चर्चित हत्याकांड में सौदेबाजी के गंभीर आरोपों की जांच के बीच पुलिस प्रशासन कटनी की पूर्व नगर पुलिस अधीक्षक नेहा पच्चीसिया को सेवा से बर्खास्त करने की ठोस तैयारी में जुट गया है। जबलपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अंजना तिवारी के नेतृत्व वाली विशेष जांच टीम यानी एसआईटी ने जिला जेल में बंद मुख्य आरोपियों आकाश लोधी और रमेश लोधी से लंबी पूछताछ कर अहम साक्ष्य जुटाए हैं। निर्धारित समय पर अदालत में चालान पेश न होने के कारण आरोपियों को मिली जमानत और जमीन सौदे की कड़ियों को जोड़ते हुए जांच टीम अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार कर रही है। भोपाल स्थित गृह मंत्रालय से हरी झंडी मिलते ही निलंबन के बाद बर्खास्तगी की विभागीय प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

​जेल में आरोपियों से घंटों लंबी पूछताछ हुई

​न्यायालय से विधिवत अनुमति प्राप्त करने के बाद जांच दल ने जेल परिसर में दोनों मुख्य आरोपियों से बिंदुवार सवाल-जवाब किए। एसआईटी द्वारा दर्ज बयानों का मिलान केस डायरी, तकनीकी डेटा और पूर्व में जुटाए गए साक्ष्यों से किया जा रहा है। जांच अधिकारी जमीन के कथित नामांतरण और आर्थिक लेन-देन से जुड़ी हर जानकारी को बारीकी से परख रहे हैं। दूसरी ओर मामले में अग्रिम जमानत याचिका पर भी न्यायिक स्तर पर सुनवाई चल रही है, जिसको लेकर विधिक स्तर पर जवाब देने की तैयारी की गई है।

​चार दिन से सील दफ्तर खोला गया

​घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्य जुटाने के क्रम में मंगलवार को तत्कालीन सीएसपी कार्यालय की सील खोली गई। 4 दिनों से बंद इस कक्ष में रखे तमाम रजिस्टरों, पुरानी फाइलों और कंप्यूटर हार्ड डिस्क की विस्तृत पड़ताल की जा रही है। जांचकर्ताओं का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि हत्याकांड अथवा विवादित भूमि सौदे से संबंधित कोई गोपनीय पत्राचार या आधिकारिक दस्तावेज यहां मौजूद तो नहीं है। साथ ही विभिन्न क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज एकत्र कर संदिग्धों के आने-जाने और मुलाकातों की एक सटीक समय-सारणी बनाई जा रही है।

​समय पर चालान न देना बना आधार

​जांच का सबसे अहम पहलू तय सीमा में आरोप पत्र न्यायालय में जमा न होना है, जिसके चलते आरोपियों को वैधानिक जमानत का सीधा लाभ मिल गया था। एसआईटी यह तहकीकात कर रही है कि जब चालान का मसौदा पहले से तैयार था, तो उसे रोकने में किस स्तर पर लापरवाही अथवा मिलीभगत हुई। इसके लिए पूर्व में दिए गए बयानों के आपसी विरोधाभास सुलझाने हेतु गवाहों को दोबारा तलब किया जा रहा है। एसआईटी की विस्तृत रिपोर्ट सीधे शासन को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर सेवा समाप्ति का अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

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