कटनी सौदेबाजी केस:जबलपुर एएसपी के सामने आरोपियों ने उगले कई राज

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Newzo - News Editor 58 Views
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जबलपुर। कटनी के बहुचर्चित हत्याकांड में सौदेबाजी के आरोपों की पड़ताल के लिए जबलपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अंजना तिवारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल कटनी पहुंचा है। जांच टीम ने जिला जेल में बंद मुख्य आरोपियों आकाश लोधी और रमेश लोधी से घंटों गहन पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए। इस पूरे प्रकरण में समय पर चालान पेश न होने के कारण आरोपियों को मिली डिफॉल्ट जमानत और जमीन के कथित सौदे से जुड़े भ्रष्टाचार के पहलुओं की परतें खोली जा रही हैं। वहीं अदालत में पूर्व नगर पुलिस अधीक्षक नेहा पच्चीसिया की अग्रिम जमानत याचिका पर भी समानांतर सुनवाई चल रही है। जांच एजेंसी अब जेल में दर्ज बयानों का मिलान तकनीकी साक्ष्यों, विभागीय पत्राचार और गवाहों के बयानों से करने की व्यापक रणनीति पर काम कर रही है।
​सीलबंद सीएसपी कार्यालय में अहम दस्तावेज खंगाले गए
​विगत 4 दिनों से सील किए गए तत्कालीन नगर पुलिस अधीक्षक के दफ्तर को जांच दल की मौजूदगी में खोला गया। जांच अधिकारी वहां रखी फाइलों, गोपनीय रजिस्टरों और कंप्यूटरों के इलेक्ट्रॉनिक डेटा की बारीकी से पड़ताल कर रहे हैं। टीम का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि इस गंभीर हत्याकांड अथवा विवादित भूमि के सौदे से संबंधित कोई पत्राचार या आधिकारिक दस्तावेज इस कमरे में छिपाकर तो नहीं रखा गया था। किसी भी प्रकार की संदिग्ध सामग्री या फाइल मिलने पर उसे विधिवत जब्त कर केस डायरी का हिस्सा बनाया जाएगा।
​सीसीटीवी फुटेज से बनेगी संदिग्धों की सटीक टाइमलाइन
​मामले की कड़ियों को जोड़ने के लिए वीडियो साक्ष्यों को अत्यंत महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। जांच टीम ने संबंधित थाना परिसरों, कार्यालयों और संभावित रास्तों पर लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग अपने कब्जे में ली है। इन फुटेज की मदद से यह देखा जाएगा कि किस तारीख और समय पर किन व्यक्तियों की आपस में मुलाकात हुई थी। वीडियो रिकॉर्डिंग का मिलान जेल में बंद आरोपियों के बयानों से किया जाएगा, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि तत्कालीन अधिकारियों और आरोपियों के बीच क्या कोई गुप्त संपर्क हुआ था।
​विरोधाभास तलाशने पुराने गवाहों से पुनः सवाल होंगे
​जांच दल अब इस बात की तह तक जाने में जुटा है कि वैधानिक 90 दिनों की अवधि के भीतर अदालत में अभियोग पत्र प्रस्तुत क्यों नहीं किया गया, जिससे आरोपियों को कानूनी छूट का फायदा मिला। इसके साथ ही पूर्व में बयान दर्ज करा चुके गवाहों को दोबारा तलब करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जमीन के नामांतरण, सौदे की रकम और पुलिस की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर दिए गए बयानों के अंतर को सामने लाया जाएगा, ताकि पूरी साजिश की सच्चाई अदालत के समक्ष रखी जा सके।

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