
जबलपुर। मध्य प्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद के चुनावी समर में उतरे पूर्व न्यायिक अधिकारी और अधिवक्ता नरेंद्र कुमार जैन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने अनुशासनहीनता व अवमानना के आरोपों के तहत उनका वकालत लाइसेंस स्थायी तौर पर निरस्त कर चुनाव लड़ने पर रोक लगाई थी। इस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी। अदालत में वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने नरेंद्र जैन का पक्ष रखा। शीर्ष अदालत ने प्रतिवादी पक्ष को 4 सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का नोटिस देते हुए मामले से जुड़े अनुशासनात्मक रिकॉर्ड तलब किए हैं।
राज्य अधिवक्ता परिषद चुनाव का खुला नया रास्ता
सुप्रीम कोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद नरेंद्र कुमार जैन के लिए कानूनी अड़चनें दूर हो गई हैं और उनके चुनाव लड़ने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
