परसाई का लेखन आज भी व्यवस्था को झकझोरता है:शुक्ल

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Newzo - News Editor 102 Views
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जबलपुर। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय महाकोशल स्वशासी अग्रणी महाविद्यालय के हिंदी विभाग में आज को प्रख्यात व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई की जयंती पर विशेष विचार संगोष्ठी का आयोजन हुआ। इस अकादमिक सत्र में हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. अरुण शुक्ल, महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अलकेश चतुर्वेदी और प्राध्यापक डॉ. तृप्ति उकास ने प्रमुख वक्ता के रूप में अपने विचार रखे। कार्यक्रम के दौरान मंच और सभागार में डॉ. महेंद्र कुमार कुशवाहा, लल्लाबाई लोधी तथा डॉ. तरुणेन्द्र साकेत सहित बड़ी संख्या में महाविद्यालयीन छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को परसाई के रचना संसार, उनकी वैचारिक दृष्टि, जनसरोकार और युगीन यथार्थ से गहराई के साथ परिचित कराना रहा, जिसमें सभी वक्ताओं ने साहित्य और समाज के अंतर्संबंधों पर सारगर्भित विचार साझा किए।

​साहित्यिक विसंगतियों पर निर्भीक प्रहार और जनचेतना

​सत्र में हिंदी विभागाध्यक्ष श्री शुक्ल ने स्पष्ट किया कि परसाई का संपूर्ण लेखन समाज को भीतर तक झकझोरने और व्यवस्थागत कमियों पर आत्ममंथन करने का सशक्त जरिया है। उनकी कृतियां वर्तमान दौर में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी अपने रचनाकाल में थीं। वहीं प्राचार्य ने अपने संबोधन में रेखांकित किया कि तत्कालीन दौर के भ्रष्टाचार, राजनीतिक पाखंड और विद्रूपताओं को उजागर करने में उनकी लेखनी बिना किसी दबाव के लगातार मुखर रही। उन्होंने साहित्य को केवल मनोरंजन का साधन न मानकर व्यवस्था सुधार और जनचेतना का एक ठोस माध्यम बनाया।

​मध्यम वर्ग का यथार्थ और सहज भाषाई तेवर

​संगोष्ठी में वक्ताओं ने परसाई की अनूठी शैली का विश्लेषण करते हुए बताया कि उन्होंने आम बोलचाल के सीधे शब्दों से गहरी मार करने वाला शिल्प गढ़ा। साधारण नागरिक की रोजमर्रा की परेशानियों, मध्यवर्गीय परिवारों के संघर्षों और आंतरिक अंतर्विरोधों को उन्होंने अत्यंत बारीकी से पन्नों पर उतारा। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित प्राध्यापकों और विद्यार्थियों ने रचनाओं के विभिन्न पक्षों पर संवाद स्थापित किया, जिससे युवा वर्ग को व्यंग्य विधा के सामाजिक दायित्व की सही समझ मिली।

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