
आगरा। आगरा मंडल के विद्युत विभाग में तैनात गुड्स लोको पायलट जितेंद्र कुमार मीणा को भरतपुर रेलवे अदालत से बड़ी राहत मिली है। 1 अगस्त को गाड़ी संख्या 22988 अजमेर एक्सप्रेस में भरतपुर के पास चले विशेष मजिस्ट्रेट चेकिंग अभियान के दौरान चेकिंग दस्ते ने ऑन ड्यूटी जा रहे जितेंद्र को कागजी टिकट या पास न होने पर बिना टिकट मान लिया था। उनके पास डिजिटल ई ड्यूटी पास उपलब्ध था, जिसे दस्ते ने अमान्य करते हुए रेल अधिनियम की धारा 137 में मामला दर्ज कर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश होने का नोटिस थमा दिया था। सोमवार को रेलवे अदालत में पेशी के दौरान मजिस्ट्रेट ने पूरे प्रकरण पर विचार करते हुए लोको पायलट को बिना किसी जुर्माने के सीधे माफ कर दिया।
डिजिटल पास दिखाने पर भी दर्ज हुआ मुकदमा
चेकिंग अभियान के समय जब जांच दल ने यात्रा अधिकार पत्र मांगा, तब लोको पायलट ने अपने मोबाइल में अधिकृत इलेक्ट्रॉनिक यात्रा पास प्रस्तुत किया। चेकिंग अमले ने केवल भौतिक दस्तावेज की अनिवार्यता बताते हुए इसे स्वीकार करने से इंकार कर दिया। रेल प्रशासन के नियमानुसार ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को ई पास की सुविधा दी जाती है, लेकिन मौके पर मौजूद अधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाते हुए कानूनी कार्रवाई की राह चुनी। न्यायिक नोटिस जारी होने के बाद कर्मचारी को अदालत में उपस्थित होकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया था, जिसके बाद यह पूरा प्रकरण कानूनी प्रक्रिया के दायरे में पहुंच गया।
सोशल मीडिया पर नियमों को लेकर छिड़ी बहस
इस घटनाक्रम के सामने आते ही इंटरनेट और कर्मचारियों के विभिन्न मंचों पर 2 अलग विचार देखने को मिले। एक धड़े का तर्क था कि टिकट जांच दल ने तय नियमों के तहत कार्य किया और किसी भी कर्मी को बिना वैध भौतिक कागजात के यात्रा की छूट नहीं मिलनी चाहिए। वहीं दूसरे पक्ष ने आधुनिक डिजिटल व्यवस्था का समर्थन करते हुए कहा कि जब विभाग स्वयं इलेक्ट्रॉनिक पास जारी कर रहा है, तो ऑन ड्यूटी कर्मी पर ऐसी दंडात्मक कार्रवाई पूरी तरह अनुचित है। सोमवार को अदालत द्वारा दी गई राहत के बाद इस विवाद का समाधान हो गया और कर्मचारी बिना किसी आर्थिक दंड के कार्य पर लौट सके।
