
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने विदिशा जिले में उफनती बेतवा नदी के स्टॉप डैम पर जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने वाले बच्चों के वायरल वीडियो पर स्वतः संज्ञान लिया है। इस गंभीर मामले में अदालत ने राज्य सरकार, लोक निर्माण विभाग और विदिशा कलेक्टर को आधिकारिक नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। प्रकरण के अनुसार विदिशा जिले के ग्राम पलोह के शासकीय हाई स्कूल में ककरूआ, इमलिया, बंधेरा और बहलोद चक गांव के बच्चे पढ़ाई करने जाते हैं। यहां बेतवा नदी पर बने स्टॉप डैम को पार करने में बच्चे अपनी जान दांव पर लगाते हैं। सड़क मार्ग से स्कूल की दूरी 10 से 15 किलोमीटर है, जबकि स्टॉप डैम पार करने पर यह दूरी मात्र 1.5 किलोमीटर रह जाती है।
स्टॉप डैम पार करते हैं मासूम बच्चे
बारिश के मौसम में बेतवा नदी का जलस्तर काफी बढ़ जाता है और पानी उफान पर रहता है। इसके बावजूद मजबूरी में इन ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे-छोटे छात्र-छात्राएं स्टॉप डैम के बेहद संकरे और फिसलन भरे मोहरों पर छलांग लगाकर नदी पार करते हैं। स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों का कहना है कि इस खतरनाक रास्ते से गुजरने के दौरान जरा सी चूक किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है और किसी भी छात्र की जान जा सकती है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर मौके पर किसी भी तरह के सुरक्षा इंतजाम या बैरिकेडिंग नहीं की गई है। हाल ही में इस जानलेवा आवागमन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हुआ था। यह वीडियो जैसे ही जिम्मेदार अधिकारियों और उच्च न्यायालय तक पहुंचा, वैसे ही इस पर स्वतः संज्ञान लिया गया।
अदालत ने मांगा मामले पर जवाब
वायरल वीडियो के कोर्ट द्वारा संज्ञान में लिए जाने के बाद प्रशासनिक अमले और शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। क्षेत्र के लोग लगातार बच्चों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने और नदी पर तुरंत एक सुरक्षित पुल या वैकल्पिक मार्ग बनाने की मांग कर रहे हैं। हाई कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब यह उम्मीद की जा रही है कि संबंधित विभाग और जिला प्रशासन इस गंभीर और संवेदनशील समस्या का जल्द ही कोई स्थायी समाधान निकालेंगे। ऐसा होने से बच्चों को अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल नहीं जाना पड़ेगा। सड़क मार्ग की अत्यधिक लंबी दूरी और ग्रामीण इलाकों के खराब रास्तों के कारण ये मासूम बच्चे इस जानलेवा शॉर्टकट विकल्प को चुनने के लिए पूरी तरह विवश हैं। अब देखना यह होगा कि कोर्ट के इस नोटिस के बाद प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है।
