रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजेश वर्मा पर राजभवन की सख्त कार्रवाई, धारा 52 लागू करने की तैयारी

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Newzo - News Editor 114 Views
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जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर राजभवन ने सख्त कदम उठाया है। राज्यपाल सचिवालय ने विश्वविद्यालय के कामकाज की उच्च स्तरीय जांच कराने के आदेश मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग को सौंप दिए हैं। इसके साथ ही कुलगुरु प्रो. राजेश वर्मा के खिलाफ वैधानिक कदम उठाते हुए धारा 52 लागू करने के संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने के स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई से विश्वविद्यालय के गलियारों में खलबली मच गई है। राजभवन के इस फैसले से शिक्षा जगत में हड़कंप की स्थिति बन गई है क्योंकि पहली बार धारा 52 लागू करने के लिए सीधे इस तरह के निर्देश सामने आए हैं।

​राज्यपाल के निर्देश से विश्वविद्यालय परिसर में मचा हड़कंप

​राज्यपाल के उप सचिव कार्यालय से जारी आधिकारिक पत्र क्रमांक 574/रास/्यू.ए.-2/2026 के जरिए मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को पूरी प्रक्रिया जल्द पूरी करने को कहा गया है। यह पूरा मामला 20 जून को राजभवन में दर्ज कराई गई एक गंभीर शिकायत से जुड़ा हुआ है। शिकायतकर्ता ने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कार्यों में व्यापक स्तर पर गड़बड़ियों और अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। पत्र में मांग की गई थी कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 52 लागू की जाए। इसके अलावा वर्तमान कुलगुरु प्रो. राजेश वर्मा के विरुद्ध भी ठोस वैधानिक कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया था। राजभवन ने इस मूल शिकायत पत्र को उच्च शिक्षा विभाग के पास भेजकर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

​उच्च शिक्षा विभाग के अगले कदम पर टिकी सबकी निगाहें

​शिकायत का पत्र सामने आने के बाद से ही विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारियों की नींद उड़ गई है। हर कोई यही चर्चा कर रहा है कि अब उच्च शिक्षा विभाग इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन के भीतर आंतरिक चर्चाएं तेज हो गई हैं क्योंकि संभावित जांच कमेटी के गठन की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है। छात्र संगठनों से लेकर शिक्षक वर्ग तक हर शख्स इस बात पर नजर गड़ाए बैठा है कि शासन स्तर पर अगला बड़ा फैसला कब और क्या लिया जाएगा। राजभवन की इस सख्ती से यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में विश्वविद्यालय प्रशासन पर शिकंजा और अधिक कसने वाला है। सभी संबंधित विभाग अब राजभवन के निर्देशों का पालन करने की तैयारियों में जुट गए हैं।

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