
नागरिक उपभोक्ता मंच रखेगा अपना मजबूत पक्ष,आर्थिक और शैक्षणिक आधार पर बदलेगी पूरी रूपरेखा
जबलपुर। जबलपुर की पहचान बन चुके मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय को अलग हिस्सों में बांटने की तैयारी तेज हो गई है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने इस संबंध में अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को एक महत्वपूर्ण पत्र भेजा है। इस पत्र के माध्यम से मांग की गई है कि यूनिवर्सिटी के विभाजन के लिए बनने वाली विशेष समीक्षा समिति के समक्ष उपभोक्ता मंच को भी अपना पक्ष और सुझाव रखने का उचित अवसर दिया जाए। इस महत्वपूर्ण बैठक में मंच के प्रमुख सदस्य रजत भार्गव, वेदप्रकाश अघौलिया, टी.के. रायघटक, डी.के. सिंह, सुशीला कनौजिया, गीता पांडे, सुभाष चंद्रा, पी.एस. राजपूत, राजेश गिदरोनिया, जी.एस. सोनकर और डी.आर. लखेरा आदि उपस्थित रहे।
तीन बिंदुओं पर आधारित होगी व्यापक समीक्षा
यूनिवर्सिटी को बांटने के लिए गठित होने वाली नई समिति मुख्य रूप से 3 बड़े मोर्चों पर काम करेगी। यह टीम मुख्य रूप से आर्थिक, शैक्षणिक और प्रशासनिक बिंदुओं के आधार पर पूरी व्यवस्था की समीक्षा करेगी। शासन स्तर पर इस बात को लेकर भी गहरा मंथन चल रहा है कि मेडिकल यूनिवर्सिटी को 3 अलग भागों में विभाजित करने के बजाय सिर्फ 2 हिस्सों में ही बांटा जाए। इस नवगठित समिति की जांच रिपोर्ट और निष्कर्षों के आधार पर ही लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग आगामी समय में अंतिम निर्णय के लिए मंत्रिमंडल परिषद को अपना आधिकारिक प्रस्ताव मंजूरी हेतु भेजेगा।
आईएएस अधिकारी संभालेंगे समिति की पूरी कमान
इस जांच समिति को बनाने की प्रशासनिक पहल हाल ही में शुरू की गई है, जिसके संचालन की मुख्य जिम्मेदारी किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को सौंपी जाएगी। डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने बताया कि 6 जून को अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल से फोन पर लंबी चर्चा हुई थी। इस बातचीत के दौरान प्रशासनिक अधिकारी ने स्पष्ट किया था कि मेडिकल यूनिवर्सिटी को हिस्सों में बांटने का अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। यदि इस प्रकार का कोई नया प्रस्ताव सामने आता है तो उस पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। अशोक वर्णवाल के इसी आश्वासन के बाद उपभोक्ता मंच ने समिति के सामने अपनी बात रखने की मांग उठाई है।
जनप्रतिनिधियों से आगे आने की बड़ी अपील
यूनिवर्सिटी के संभावित विखंडन को देखते हुए नागरिक मंच ने जबलपुर के तमाम जनप्रतिनिधियों से इस संवेदनशील मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है। मंच का मानना है कि इस विभाजन से संस्थान के मूल स्वरूप को बड़ा खतरा पैदा हो सकता है, इसलिए स्थानीय नेताओं को आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
