
जबलपुर। जापान में आयोजित अंडर 18 एशिया कप हॉकी टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीतकर लौटे जबलपुर के होनहार खिलाड़ी आयुष रजक और सिद्धार्थ बेन को व्यवस्था की बेरुखी का सामना करना पड़ा। भोपाल स्टेशन पर जब ये दोनों चैंपियन पहुंचे, तो अमरकंटक एक्सप्रेस में उनका कोई रिजर्वेशन नहीं था और वे सामान्य डिब्बे में सफर करने को मजबूर थे। इस बात की जानकारी जब जबलपुर के पूर्व राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी और रेलवे के सेवानिवृत्त टीसी मोहम्मद मोइनुद्दीन को मिली, तो उन्होंने तुरंत भोपाल संपर्क कर ट्रेन के टीसी के माध्यम से दोनों खिलाड़ियों को सम्मानपूर्वक एसी कोच में सीट दिलवाई। मंगलवार रात जबलपुर पहुंचने पर इन स्वर्ण पदक विजेताओं का स्वागत उनके कोच मोहम्मद शकील, अकबर खान, खेल प्रेमियों और परिजनों ने फूलमालाओं से किया।
गुमनामी के बीच अपनों का मिला साथ
रात में जब ट्रेन जबलपुर स्टेशन पर रुकी, तो वहां कोई बड़ा सरकारी अमला या खेल विभाग का अधिकारी मौजूद नहीं था। खिलाड़ियों के स्वागत के लिए केवल उनके परिजन, कोच मोहम्मद शकील, अकबर खान, वरिष्ठ हॉकी खिलाड़ी मोहम्मद मोइनुद्दीन, राकेश श्रीवास, गजेंद्र सिंह मेहरोलिया, मोहम्मद जाकिर, विजय कुमार खाखड़ और महाकौशल खेल परिषद के डा. प्रशांत मिश्रा ही पहुंचे थे। समाज के कुछ लोगों ने आधा-आधा किलो लड्डू और फूलमालाओं से दोनों का हौसला बढ़ाया। ढोल-नगाड़ों की आवाज शांत होने के बाद स्टेशन से लेकर सड़कों तक सन्नाटा पसर गया, जो खेल तंत्र की उदासीनता को बयां कर रहा था।
घर पहुंचकर जताया सम्मान
अगले दिन खेल से जुड़े वरिष्ठ जनों ने खिलाड़ियों के संघर्ष को पहचानते हुए उनके घरों का रुख किया। वरिष्ठ हॉकी खिलाड़ी मोहम्मद मोइनुद्दीन, राकेश श्रीवास, विजय कुमार, कोच मोहम्मद शकील, अकबर खान और कटंगा स्कूल के व्यायाम शिक्षक काशी प्रसाद वर्मा ने आयुष और सिद्धार्थ के घर जाकर उनके माता-पिता को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। इस दौरान खेल प्रेमियों ने उनके उज्ज्वल भविष्य और आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए प्रार्थना की। खेल के मैदान पर देश का नाम रोशन करने वाले इन खिलाड़ियों के घरों की माली हालत बेहद सामान्य है, जिसके सुधरने की उम्मीद अब उनकी अगली सफलताओं पर टिकी है।
