सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के दावों के बीच पुलिस की सुस्ती से लोगों में आक्रोश

जबलपुर। गौर चौकी क्षेत्र में २४ मई की रात आलोक शुक्ला के घर पर हुए जानलेवा हमले, लूटपाट, मारपीट और वाहनों में तोड़फोड़ के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस घटना के पुख्ता सीसीटीवी फुटेज और पर्याप्त सबूत होने के बावजूद पुलिस अब तक सिर्फ जांच की बात कहकर मामले को टाल रही है। पीड़ित आलोक शुक्ला न्याय के लिए लगातार भटक रहे हैं, लेकिन स्थानीय पुलिस प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर बजरंग दल और स्थानीय ग्रामीण वासियों ने जनसुनवाई के माध्यम से एक शिकायती पत्र सौंपा है। इस शिकायत में स्पष्ट रूप से लखन दुबे, शंकर दुबे, शिवम चौबे, हिमांशु दुबे, रामनारायण दुबे और उनके परिवार के सदस्यों सहित अन्य साथियों पर घर में घुसकर आतंक मचाने का सीधा आरोप लगाया गया है।
रक्षक की भूमिका और कार्यशैली पर गहराता संदेह
इस पूरे विवाद में स्थानीय चौकी प्रभारी नितिन पांडे की भूमिका को लेकर क्षेत्र के नागरिकों में गहरा असंतोष है। आरोप है कि इतने संवेदनशील और बड़े मामले को बेहद मामूली धाराओं में दर्ज करके रफा-दफा करने का प्रयास किया गया। हद तो तब हो गई जब चौकी प्रभारी ने मुख्य आरोपियों पर सख्त कार्रवाई करने के बजाय उल्टा फरियादी पक्ष के खिलाफ ही काउंटर मामला दर्ज कर लिया। इस तरह के एकतरफा रवैए से पीड़ित परिवार और स्थानीय निवासियों में यह अंदेशा मजबूत हो रहा है कि पुलिस प्रशासन की आरोपियों के साथ कहीं न कहीं सांठ-गांठ है, जिसके कारण दोषियों को लगातार संरक्षण मिल रहा है।
आला अधिकारियों के आश्वासन के बाद भी ढाक के तीन पात
मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सूर्यकांत शर्मा को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया था। उस दौरान उच्च अधिकारी की तरफ से आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने और पीड़ितों पर दर्ज किए गए गलत मुकदमों को वापस लेने का भरोसा दिया गया था। इस आश्वासन के बाद भी धरातल पर लगभग १ हफ्ता बीत जाने पर कोई प्रगति दिखाई नहीं दी है। सच्चाई पूरी तरह साफ होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों से लेकर थाने के स्टाफ तक सब कुछ जानकर अनजान बने हुए हैं, जिससे आम जनता का कानून व्यवस्था से भरोसा उठ रहा है।
न्याय न मिलने पर बड़े आंदोलन की तैयारी
घटना की रात जो कुछ भी हुआ, उसकी हकीकत पूरे क्षेत्र के लोगों को अच्छी तरह पता है। सीसीटीवी कैमरों में कैद तस्वीरें चीख-चीखकर गवाही दे रही हैं, फिर भी पुलिस विभाग द्वारा इस सच्चाई को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जा रहा है। इस टालमटोल की असली वजह क्या है, यह आज एक बड़ा अनुत्तरित सवाल बन चुका है। पुलिस के इस ढुलमुल रवैए और आरोपियों की खुलेआम आवाजाही से परेशान होकर अब फरियादियों और क्षेत्रीय जनता ने उग्र रुख अख्तियार कर लिया है। न्याय की मांग को लेकर स्थानीय नागरिकों ने अब सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करने की दो टूक चेतावनी दी है।
