सोनू बचवानी कैसे बने भाजपा के महामंत्री: लोकल विधायक के वीटो पर भारी पड़ी चंबल की सिफारिश

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Newzo - News Editor 105 Views
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जबलपुर। लंबी जद्दोजहद के बाद आखिरकार भाजपा महानगर संगठन के विस्तार में सोनू बचवानी को महामंत्री नियुक्त कर दिया गया। उनकी इस नियुक्ति के पीछे सत्ता और संगठन के बीच गहरा सियासी टकराव सामने आया है। जबलपुर के स्थानीय विधायक ने सोनू बचवानी की दावेदारी का कड़ा विरोध किया था, जिसके कारण पूर्व में भी उनकी नियुक्ति रुक चुकी थी। भोपाल स्तर पर सरकार और संगठन के बीच यह सहमति बन चुकी थी कि विधायक की आपत्ति के बाद सोनू को इस पद से दूर रखा जाएगा। इसके बावजूद जबलपुर के स्थानीय संगठन के शीर्ष पदाधिकारी सोनू बचवानी के नाम पर अड़े हुए थे। अंततः चंबल संभाग के एक बेहद प्रभावशाली और दबंग नेता के हस्तक्षेप और मजबूत सिफारिश के बाद समीकरण पूरी तरह बदल गए। चंबल के नेता के वीटो के आगे स्थानीय विधायक का विरोध निष्प्रभावी साबित हुआ और संगठन को सोनू बछवानी के नाम पर मुहर लगानी पड़ी। इस नियुक्ति से स्थानीय विधायक और नवनियुक्त महामंत्री के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और तेज हो गई है।

​विधायक के कड़े विरोध के बाद भी संगठन का फैसला

​सोनू के लिए महानगर महामंत्री का पद हासिल करना बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। जबलपुर के स्थानीय विधायक ने उनकी नियुक्ति को रोकने के लिए अपनी पूरी राजनीतिक ताकत झोंक दी थी। विधायक की नाराजगी और दबाव के कारण भोपाल में बैठे बड़े नेताओं ने भी मन बना लिया था कि विवाद से बचने के लिए सोनू को इस बार मौका नहीं दिया जाएगा। इससे पहले भी कई संगठनात्मक पदों पर सोनू बचवानी दावेदारी पेश कर चुके थे, लेकिन हर बार स्थानीय विरोध के चलते उन्हें खाली हाथ रहना पड़ा था। इस बार भी विधायक का विरोध इतना प्रभावी था कि एक समय सूची से उनका नाम लगभग कट चुका था। लेकिन स्थानीय स्तर पर संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी सोनू के पक्ष में पूरी ताकत से खड़े रहे और उन्होंने पैरवी जारी रखी।

​चंबल के कद्दावर नेता की एंट्री से बदले समीकरण

​जब भोपाल से लेकर जबलपुर तक सोनू बचवानी की राह में रोड़े अटकाए जा रहे थे, तब चंबल क्षेत्र के एक कद्दावर नेता की एंट्री ने पूरे घटनाक्रम को पलट दिया। चंबल संभाग के इस दबंग नेता ने संगठन के उच्च स्तर पर सोनू के नाम की जोरदार वकालत की। इस हाई-प्रोफाइल सिफारिश के सामने भोपाल से लेकर दिल्ली तक का नेतृत्व झुक गया। चंबल के नेता के सीधे हस्तक्षेप के कारण स्थानीय विधायक के तमाम विरोध धरे के धरे रह गए। जो नियुक्ति पूरी तरह से रद्द मानी जा रही थी, वह इस एक पैरवी के कारण हकीकत में बदल गई और सोनू आखिरकार भाजपा महानगर के महामंत्री की कुर्सी तक पहुंचने में सफल रहे।

​भविष्य की विधायकी के टिकट पर मंडराया संकट

​सोनू की इस जीत के बाद अब जबलपुर भाजपा के अंदरूनी गलियारों में एक नई राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। स्थानीय विधायक अब बचवानी के उभार को अपनी खुद की राजनैतिक जमीन के लिए एक बड़े खतरे के रूप में देख रही हैं। संगठन के गलियारों में यह बात तेजी से फैल रही है कि महामंत्री बनने के बाद सोनू आने वाले समय में विधानसभा चुनाव के लिए मजबूत दावेदारी ठोक सकते हैं। विधायक को डर है कि संगठन में मजबूत पकड़ बनाने के बाद उनके विधानसभा क्षेत्र से टिकट की रेस में सबसे आगे निकल सकते हैं। इसी डर के कारण भोपाल से लेकर स्थानीय स्तर तक लॉबिंग की जा रही थी, जो अंततः विफल साबित हुई।

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