
जबलपुर। बरगी डैम में 30 अप्रैल 2026 को हुए भीषण क्रूज हादसे की जांच कर रहे सरकारी जांच आयोग के समक्ष एक बड़ा प्रशासनिक और कानूनी फर्जीवाड़ा खुलकर सामने आया है। इस मामले में याचिकाकर्ता अखिलेश त्रिपाठी ने महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ एक विस्तृत हलफनामा पेश किया है। इन सरकारी कागजातों से यह साबित हो गया है कि दुर्घटनाग्रस्त क्रूज और उसमें सवार पर्यटकों का कोई वैध बीमा नहीं था। संचालक मंडल ने क्रूज के स्थान पर मैकल रिसॉर्ट की पुरानी बीमा पॉलिसी दिखाकर यात्रियों की सुरक्षा के साथ गंभीर धोखाधड़ी की। इसके अतिरिक्त मध्य प्रदेश अंतर्देशीय भाप पोत नियम 1962 के नियम 6 के तहत इस व्यावसायिक पोत का कोई फिटनेस सर्वे भी नहीं कराया गया था। मौसम विभाग की आंधी-तूफान संबंधी चेतावनियों को भी पूरी तरह से दरकिनार किया गया, जिससे यह गंभीर संकट खड़ा हुआ।
पर्यटन नियमों और केंद्रीय अंतर्देशीय पोत अधिनियम का खुला उल्लंघन
इस गंभीर हादसे की प्रशासनिक जांच से यह स्पष्ट हो गया है कि केंद्र सरकार के अंतर्देशीय पोत अधिनियम 2022 की धारा 3, 17, 18 और 66 के तहत निर्धारित अनिवार्य सुरक्षा मानकों की पूरी तरह से अनदेखी की गई। पानी में व्यावसायिक संचालन करने वाले हर छोटे-बड़े जहाज का वैधानिक पंजीकरण और यात्रियों का पूर्ण जीवन बीमा होना अत्यंत आवश्यक है। जहाज संचालक ने प्रशासन को गुमराह करने के लिए क्रूज के नाम पर जो बीमा दस्तावेज सौंपे थे, वे असल में मैकल रिसॉर्ट की संपत्ति के निकले। इस प्रकार यात्रियों को भगवान भरोसे छोड़कर बिना किसी वित्तीय और शारीरिक सुरक्षा गारंटी के क्रूज का संचालन लगातार किया जा रहा था।
गोवा और केरल जैसी सख्त जल परिवहन नीति की मध्य प्रदेश में अनदेखी
देश के अन्य तटीय राज्यों की तुलना में मध्य प्रदेश का पर्यटन और जल परिवहन विभाग सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने में पूरी तरह नाकाम रहा है। गोवा, महाराष्ट्र और केरल जैसे राज्यों ने अपने यहां जल परिवहन और साहसिक पर्यटन के लिए बेहद कड़े कानून लागू कर रखे हैं। उदाहरण के लिए गोवा के 2005 के जल पर्यटन नियमों के अनुसार प्रत्येक यात्री का कम से कम 2 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा होना अनिवार्य है। इसके साथ ही नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वॉटर स्पोर्ट्स से क्रूज का फिटनेस प्रमाण पत्र प्राप्त करना और जहाज पर पूरी तरह प्रशिक्षित चालक दल की तैनाती करना कानूनी रूप से जरूरी है, जिसकी मध्य प्रदेश में भारी कमी देखी गई।
मौसम विभाग के तीन स्तरीय अलर्ट को प्रशासनिक स्तर पर दबाने की लापरवाही
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के 2021 के मानक संचालन प्रक्रिया के खंड 1.4 और 1.4.3 के तहत देश भर में एक अत्यंत संवेदनशील तीन स्तरीय मौसम पूर्वानुमान प्रणाली काम करती है। इस नियमावली के अनुसार राज्य मौसम पूर्वानुमान केंद्र का यह दायित्व है कि वह बड़े पर्यटन स्थलों और reservoirs के लिए विशेष मौसम चेतावनी जारी करे। हादसे वाले दिन भी मौसम विज्ञान विभाग द्वारा समय रहते तेज आंधी और आंधी-तूफान का स्पष्ट अलर्ट जारी किया गया था। इसके बावजूद पर्यटन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों और क्रूज प्रबंधन ने इस जीवन रक्षक चेतावनी को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया।
जांच आयोग के तीखे सवालों से घिरे जिम्मेदार अधिकारी और क्रूज प्रबंधन
दस्तावेजों के आधिकारिक खुलासे के बाद जांच आयोग के सामने उपस्थित राज्य सरकार के जिम्मेदार अधिकारी और क्रूज प्रबंधन के प्रतिनिधि पूरी तरह से निरुत्तर नजर आए। बिना फिटनेस सर्टिफिकेट और बिना वैध यात्री बीमे के इतने बड़े क्रूज को गहरे पानी में उतारने की अनुमति देने के कारणों पर अधिकारी कोई स्पष्ट स्पष्टीकरण नहीं दे सके। कागजी हेरफेर और मौसम के अलर्ट को दबाने की इस दोहरी लापरवाही ने कई पर्यटकों की जान को सीधे जोखिम में डाल दिया। इस गंभीर रिपोर्ट के बाद अब जांच आयोग राज्य सरकार के उच्च अधिकारियों को तलब कर कड़ी कार्रवाई की सिफारिश करने की तैयारी में है।
