
जबलपुर। मध्य प्रदेश के भोपाल में अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में उनकी सास और सेवानिवृत्त न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत निरस्त करने की याचिका पर बुधवार को जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। मृतका के पिता नवनिधि शर्मा और मध्य प्रदेश शासन ने इस जमानत का कड़ा विरोध किया है, जबकि महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने आरोपी पर जांच में सहयोग न करने का आरोप लगाया है। इस बीच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई ने मामले की कमान संभालते हुए गिरिबाला सिंह और उनके गिरफ्तार बेटे समर्थ सिंह के खिलाफ दहेज उत्पीड़न की प्राथमिकी दर्ज कर ली है। दिल्ली एम्स की टीम द्वारा मृतका का दोबारा पोस्टमॉर्टम किए जाने के बाद भाई मेजर हर्षित ने भोपाल में उनका अंतिम संस्कार किया।
डिजिटल सबूतों और कॉल रिकॉर्ड की पड़ताल
पुलिस और जांच टीमों का ध्यान अब पूरी तरह से तकनीकी साक्ष्यों को सुरक्षित करने पर है। भोपाल जिला अदालत में ट्विशा के परिजनों की ओर से वकील अंकुर पांडे द्वारा कॉल डिटेल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग पर एसआईटी ने जवाब दिया कि 12 से 20 मई तक की सीडीआर के लिए दूरसंचार कंपनियों को पत्र लिखे गए हैं। परिजनों का दावा है कि वारदात के बाद पूर्व जज ने 46 बार विभिन्न नंबरों पर संपर्क किया था, जिनमें कई न्यायिक अधिकारी और जांच अधिकारी शामिल हैं। दूसरी तरफ आरोपी पक्ष की ओर से वकील मृगेंद्र सिंह ने भी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के लिए अदालत में आवेदन लगाया है, जिस पर सुनवाई जारी है।
सीबीआई की सख्त कार्रवाई और पूछताछ
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई की टीमों ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। एक टीम ने कमिश्नर संजय कुमार से मुलाकात कर एसआईटी की केस डायरी अपने कब्जे में ली, जिसे अधूरा होने के कारण देर रात पूरा करवाकर सौंपा गया। इसके साथ ही सीबीआई के अधिकारियों ने पूर्व जज के घर पहुंचकर उनके बयान दर्ज किए और सैन्य क्षेत्र में जाकर मृतका के मायके पक्ष से भी बातचीत की। आरोपियों पर लगे आरोपों में दहेज के लिए पैसों की मांग का बिंदु भी शामिल किया गया है, जिसके बाद जांच की गति काफी बढ़ गई है।
वैवाहिक रिश्ते में तनाव और विवाद
गिरफ्तार पति समर्थ सिंह ने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया कि शादी के पांच महीनों के भीतर ही दोनों के संबंध बेहद तनावपूर्ण हो गए थे। हालांकि उसने किसी भी प्रकार की शारीरिक प्रताड़ना या हिंसा के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। समर्थ के अनुसार मार्च में ट्विशा के भाई की शादी के बाद से ही आपसी झगड़े बढ़ने लगे थे। जांच दल अब इस बात का पता लगा रहा है कि शादी के इतने कम समय में ट्विशा कितनी बार अपनी मर्जी से या विवादों के कारण मायके गईं और दोनों के बीच विवाद की मुख्य वजहें क्या थीं।
मानसिक स्वास्थ्य और गर्भावस्था पर सवाल
जांच में यह बात भी सामने आई है कि ट्विशा की गर्भावस्था और गर्भपात को लेकर दोनों पक्षों में गहरा विवाद था। मृतका के मोबाइल संदेशों से संकेत मिले हैं कि समर्थ ने बच्चे के पितृत्व पर संदेह जताया था, जबकि समर्थ का कहना है कि वह और उसकी मां बच्चा चाहते थे लेकिन गर्भधारण के बाद से ही ट्विशा अवसाद में थीं। ट्विशा के परिवार के वकील पीयूष तिवारी के अनुसार इस विवाद के बाद ही मृतका का मनोचिकित्सक से इलाज शुरू कराया गया जिससे उनका वजन 15 किलो कम हो गया था। सीबीआई अब बिना पारिवारिक सहमति के दी जाने वाली नींद की दवाओं और इलाज की वैधानिकता की बारीकी से जांच कर रही है।
