
जबलपुर। प्रधान जिला सत्र न्यायाधीश कृष्ण मूर्ति ने जज से न्याय नहीं मिलने की आशंका के आधार पर दायर की गई केस ट्रांसफर की याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि केवल इस प्रकार की आशंका किसी मामले को दूसरी अदालत में भेजने का आधार नहीं बन सकती। मामला दीक्षितपुरा जबलपुर के निवासी राजेश अवस्थी से जुड़ा है, जिसके खिलाफ माढ़ोताल थाना क्षेत्र में धोखाधड़ी और जालसाजी का मुकदमा न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में चल रहा है। आरोपी राजेश अवस्थी ने अदालत में आवेदन देकर आरोप लगाया था कि शिकायतकर्ता पक्ष की संबंधित जज से जान-पहचान है, इसलिए उसके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की जा रही है। आरोपी की ओर से दलील दी गई कि जज ने बिना किसी आवेदन के खुद संज्ञान लेते हुए आरोपी राजेश, उसकी बहन रश्मि अवस्थी और मां गीता अवस्थी के बैंक खातों को सील करने का आदेश दे दिया था। इसके जवाब में शिकायतकर्ता के अधिवक्ता आदर्श सिंह चौहान ने तर्क दिया कि आरोपी इस विवादित संपत्ति से जुड़ा सिविल केस सुप्रीम कोर्ट तक से हार चुका है, इसके बावजूद उसने जमीन बेच दी। अब वह केवल मामले को लंबा खींचने के उद्देश्य से केस ट्रांसफर की अर्जी लगा रहा है। इस संबंध में प्रधान जिला सत्र न्यायाधीश ने जब संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट डीपी सूत्रकार से जवाब मांगा, तो उन्होंने आरोपी द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह झूठा और निराधार बताया। इसके बाद अदालत ने मामले को दूसरी कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग को नामंजूर कर दिया।
