कलेक्टर ने दी एक सलाह, बिफर पड़े किसान: लचर उपार्जन व्यवस्था के खिलाफ उग्र प्रदर्शन

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Newzo - News Editor 222 Views
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45 डिग्री तापमान में भड़का अन्नदाताओं का गुस्सा, समस्याओं का समाधान न होने पर कलेक्ट्रेट परिसर में अनाज भरने की दी चेतावनी

जबलपुर। भीषण गर्मी और 45 डिग्री तापमान के बीच गेहूं उपार्जन की बदहाल व्यवस्था और जिला कलेक्टर द्वारा सरकारी केंद्रों के बजाय खुली मंडी में फसल बेचने की सलाह से नाराज किसानों ने कलेक्ट्रेट के पास घंटाघर पर दो घंटे तक उग्र प्रदर्शन किया। भारतीय किसान संघ के प्रांत महामंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख राघवेन्द्र सिंह पटेल की अगुवाई में मुख्यमंत्री के नाम डिप्टी कलेक्टर रघुवीर सिंह को एक ज्ञापन सौंपा गया। किसान नेताओं ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जिले के 14000 किसान स्लॉट बुकिंग और उपार्जन से वंचित रहे, तो वे परिवार सहित कलेक्ट्रेट परिसर में अपना गेहूं भरकर डेरा डाल देंगे। आंदोलन में प्रांत उपाध्यक्ष मोहन तिवारी, संभाग उपाध्यक्ष दामोदर पटेल, प्रांत मंत्री आलोक पटेल, जिलाध्यक्ष रामदास पटेल, जिला मंत्री धनंजय सिंह पटेल, जिला प्रचार प्रमुख भरत पटेल, पाटन तहसील अध्यक्ष मुकुल पचौरी, मंझोली तहसील अध्यक्ष वीरेंद्र पटेल, शहपुरा तहसील अध्यक्ष वीरेंद्र साहू, पनागर तहसील अध्यक्ष जितेंद्र पटेल, अटल पटेल, प्रेमचंद कुर्मी, धरम पटेल और रीतेश पचौरी मुख्य रूप से शामिल हुए।

​सर्वर की तकनीकी खराबी और स्लॉट बुकिंग ठप

​महाकौशल प्रांत के 24 जिलों में लगभग 118400 किसान सर्वर की तकनीकी खामियों के कारण अपनी उपज बेचने के लिए समय तय नहीं कर पा रहे हैं। डिजिटल पोर्टल पर स्लॉट बुक न हो पाने के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। भारतीय किसान संघ ने मांग की है कि ऑनलाइन पोर्टल की कमियों को तुरंत ठीक कर स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया दोबारा चालू की जाए। इसके साथ ही सभी पंजीकृत योग्य किसानों का उपार्जन समय पर सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े।

​केंद्रों पर बुनियादी सुविधाओं और बारदाने की कमी

​उपार्जन केंद्रों पर इस समय बारदाने की भारी कमी बनी हुई है जिससे तुलाई का काम प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा खरीदे गए गेहूं का जल्दी परिवहन कराने और किसानों के बैंक खातों में भुगतान की गति बढ़ाने की मांग भी पुरजोर तरीके से उठाई गई। भीषण गर्मी को देखते हुए सभी केंद्रों पर ठंडे पेयजल और छायादार बैठने के इंतजाम करने का आग्रह किया गया है। आगामी खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए डीएपी खाद और अन्य आवश्यक उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक अभी से गोदामों में जमा करने की बात कही गई है ताकि आगे किसानों को लाइनों में न लगना पड़े।

​खुली मंडी में बेचने के सुझाव पर उपजा भारी रोष

​उपार्जन समिति के अध्यक्ष और जिला कलेक्टर द्वारा किसानों को सरकारी केंद्रों के बजाय खुली मंडी में गेहूं बेचने का परामर्श दिया गया था जिससे किसान बेहद नाराज हैं। किसान संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रशासन अपनी कमियों और लचर व्यवस्थाओं को छुपाने के लिए इस प्रकार के गैर-जिम्मेदाराना सुझाव दे रहा है। वर्तमान में सरकार द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य और कृषि उपज मंडियों के बाजार भाव में 300 से 400 रुपये प्रति क्विंटल का एक बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। यदि किसान मजबूरी में अपनी फसल खुले बाजार में कम दाम पर बेचते हैं, तो उन्हें सीधा भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

​बिचौलियों पर सख्त कार्रवाई और आंदोलन की चेतावनी

​उपार्जन व्यवस्था में बिचौलियों और व्यापारियों के अवैध दखल को पूरी तरह बंद करने की मांग की गई है। किसानों ने दोषी अधिकारियों और संबंधित व्यापारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की बात कही है। कलेक्ट्रेट घेराव के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट रूप से सचेत किया गया है कि यदि इन बाधाओं का त्वरित निवारण नहीं हुआ तो पूरे क्षेत्र का किसान सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन शुरू करेगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी। प्रशासनिक अधिकारियों ने ज्ञापन लेने के बाद सभी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया है।

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