एमपी ट्रांसफर पॉलिसी: ई-ऑफिस से ही जारी होंगे आदेश, वरना हो जाएंगे शून्य

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Newzo - News Editor 41 Views
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मध्य प्रदेश में अधिकारी-कर्मचारियों की नई तबादला नीति लागू, ई-ऑफिस से ही जारी होंगे सभी आदेश

जबलपुर। मध्य प्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा राज्य और जिला स्तर के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए नई तबादला नीति 2026 लागू कर दी गई है। अवर सचिव सचिन्द्र राव के डिजिटल हस्ताक्षर से जारी इस नीति के तहत सूबे में ट्रांसफर की प्रक्रिया 1 जून 2026 से 15 जून 2026 तक चलेगी, जबकि शेष अवधि में सामान्य तबादलों पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। यह नीति अखिल भारतीय सेवाओं, न्यायिक सेवा, राज्य प्रशासनिक, पुलिस, वन और मंत्रालय सेवा के अफसरों पर प्रभावी नहीं होगी। नए नियमों के अनुसार सभी तबादला आदेश पूरी तरह ऑनलाइन और सिर्फ ई-ऑफिस के माध्यम से ही जारी किए जाएंगे। खास बात यह है कि 15 जून 2026 के बाद ई-ऑफिस में किए गए तबादले स्वतः ही शून्य माने जाएंगे और उनका पालन नहीं किया जाएगा। इस नीति के सुचारू संचालन और पालन की जिम्मेदारी शासन के समस्त विभागों, विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों, जिला कलेक्टरों और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को सौंपी गई है।

विभागों के लिए अलग नियम और मुख्यमंत्री समन्वय की शर्तें

​यदि कोई विभाग अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं के चलते अलग तबादला नीति बनाना चाहता है, तो उसे मुख्य प्रावधानों के अनुरूप सामान्य प्रशासन विभाग से परामर्श के बाद समन्वय में अनुमोदन लेना होगा। तय नीति से हटकर किए जाने वाले किसी भी विशेष स्थानांतरण के प्रकरण में मुख्यमंत्री के समन्वय में आदेश प्राप्त करना अनिवार्य किया गया है। सामान्य प्रतिबंध की अवधि के दौरान केवल विशेष अपवादिक परिस्थितियों में ही विभागीय मंत्री के प्रशासकीय अनुमोदन से ट्रांसफर किए जा सकेंगे। इनमें कैंसर, लकवा, हृदयाघात जैसी गंभीर बीमारियां, विधिक मजबूरी वाले अदालती फैसले, लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू या पुलिस में दर्ज आपराधिक मामले और गंभीर लापरवाही के चलते शुरू हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई वाले प्रकरण शामिल हैं। निलंबन, सेवानिवृत्ति, पदोन्नति या निधन से खाली हुए पदों को लोकहित में बहुत जरूरी होने पर भरा जा सकेगा, लेकिन किसी अन्य ट्रांसफर से पैदा हुई रिक्ति को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा।

जिले के भीतर और राज्य संवर्ग में ट्रांसफर के अधिकार

​जिला संवर्ग के कर्मचारियों और राज्य संवर्ग के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मियों का जिले के भीतर ट्रांसफर जिला कलेक्टर के माध्यम से प्रभारी मंत्री के अनुमोदन के बाद किया जाएगा, जिस पर विभागीय जिला अधिकारी के हस्ताक्षर होंगे। राज्य संवर्ग के विभागाध्यक्षों और शासकीय उपक्रमों में पदस्थ प्रथम श्रेणी के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों के ट्रांसफर आदेश मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बाद प्रशासकीय विभाग जारी करेगा। राज्य संवर्ग के अन्य सभी प्रथम श्रेणी और द्वितीय व तृतीय श्रेणी के अधिकारियों के जिले से बाहर के तबादले विभागीय मंत्री की मंजूरी से प्रशासकीय विभाग करेगा। चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के जिले से बाहर के तबादले विभागीय मंत्री के अनुमोदन से विभागाध्यक्ष द्वारा किए जाएंगे। पुलिस विभाग में उप पुलिस अधीक्षक से कनिष्ठ पदों के लिए पुलिस स्थापना बोर्ड निर्णय लेगा और जिले के भीतर पुलिस अधीक्षक प्रभारी मंत्री के अनुमोदन से पदस्थापना करेंगे, जबकि डीएसपी और उनसे सीनियर अफसरों के तबादले मुख्यमंत्री के अनुमोदन से होंगे।

पदों की संख्या के आधार पर तय हुआ तबादलों का प्रतिशत

​नई नीति में हर संवर्ग में कार्यरत कुल पदों की संख्या के आधार पर वार्षिक स्थानांतरण की अधिकतम सीमा तय कर दी गई है। जिन संवर्गों में पदों की संख्या 200 तक है, वहां अधिकतम 20 प्रतिशत ट्रांसफर हो सकेंगे। 201 से 1000 तक की पद संख्या वाले संवर्गों में 40 के साथ शेष पदों का 15 प्रतिशत और 1001 से 2000 तक की संख्या वाले संवर्गों में 160 के साथ शेष पदों का 10 प्रतिशत तक ट्रांसफर करने की अनुमति होगी। जिन संवर्गों में पदों की संख्या 2001 से अधिक है, वहां 260 के साथ ही 2000 से अधिक वाले पदों के 5 प्रतिशत की सीमा तक ही ट्रांसफर किए जा सकेंगे। स्वयं के व्यय या आपसी तालमेल से होने वाले ट्रांसफर के लिए ऑनलाइन या कार्यालय प्रमुख से सत्यापित आवेदन देना होगा और इनके आदेश प्रशासनिक ट्रांसफर से अलग जारी होंगे।

अतिशेष स्टाफ का युक्तियुक्तकरण और कार्यमुक्ति के कड़े नियम

​स्थानांतरण के जरिए खाली पदों को भरने में सबसे पहले अनुसूचित क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी और वहां 3 वर्ष की सेवा पूरी होने पर ही ट्रांसफर होगा। जिन दफ्तरों या तकनीकी व उच्च शिक्षा संस्थानों में स्वीकृत पदों से ज्यादा स्टाफ या शिक्षक हैं, वहां सबसे जूनियर कर्मचारी को अतिशेष मानकर हटाया जाएगा, हालांकि महिला, 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांग और एक वर्ष में सेवानिवृत्त होने वालों को इसमें छूट रहेगी। मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों को नियुक्ति के बाद 4 वर्ष तक तबादले से छूट मिलेगी। ट्रांसफर आदेश जारी होने के दो सप्ताह के भीतर कर्मचारी को कार्यमुक्त करना अनिवार्य होगा, जिसे विशेष परिस्थितियों में केवल 14 दिन के लिए बढ़ाया जा सकता है। तय समय सीमा के बाद संबंधित कर्मचारी का पुराने स्थान से वेतन आहरण बंद हो जाएगा और ऐसा न करना वित्तीय अनियमितता माना जाएगा।

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