हाईकोर्ट की शरण में महाकुंभ की वायरल गर्ल मोनालिसा, जानिए क्या है कारण

Newzo
Newzo - News Editor 63 Views
4 Min Read

महाकुंभ वायरल गर्ल का आयु विवाद पहुंचा मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, अंतरधार्मिक विवाह को अपराध साबित करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र में फर्जीवाड़े का आरोप

जबलपुर। महाकुंभ के दौरान सोशल मीडिया पर चर्चा में आई वायरल गर्ल मोनालिसा और उनके पति फरमान ने अपने अंतरधार्मिक विवाह और आयु विवाद को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दोनों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मोनालिसा को नाबालिग बताए जाने की प्रशासनिक और पुलिस कार्रवाई को चुनौती दी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि एक बालिग महिला के व्यक्तिगत फैसले को लव जिहाद जैसे शब्दों से जोड़कर अनावश्यक विवाद खड़ा किया गया, जिससे उनकी निजता और संवैधानिक अधिकारों का हनन हुआ है। याचिकाकर्ताओं ने इस मामले में मोनालिसा के पिता और मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक को पक्षकार बनाया है। याचिका में मांग की गई है कि सरकारी रिकॉर्ड में की गई कथित जालसाजी की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए और मोनालिसा के वास्तविक जन्म प्रमाण पत्र को बहाल किया जाए। इस मामले ने प्रदेश में व्यक्तिगत स्वतंत्रता, अंतरधार्मिक विवाह और सरकारी दस्तावेजों की विश्वसनीयता को लेकर एक नई कानूनी बहस को जन्म दे दिया है।

​मार्च माह में केरल में हुआ था विवाह

​याचिका के अनुसार मोनालिसा ने इसी वर्ष मार्च महीने में केरल जाकर फरमान के साथ विवाह किया था। विवाह के बाद यह पूरा मामला उस समय विवादों में घिर गया जब मोनालिसा के पिता ने उनकी उम्र को लेकर स्थानीय स्तर पर एक शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत के आधार पर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने मोनालिसा को नाबालिग मान लिया था। आयोग के इसी रुख के बाद मध्यप्रदेश पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए फरमान के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत आपराधिक मामला दर्ज कर लिया। हालांकि इस बीच राहत की बात यह रही कि केरल हाईकोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए 20 अप्रैल को फरमान की गिरफ्तारी पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी, जिससे उन्हें फौरी तौर पर कानूनी संरक्षण मिल गया।

​साजिश के तहत रिकॉर्ड बदलने का आरोप

​मोनालिसा की ओर से मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में प्रस्तुत की गई याचिका में बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं। याचिका में कहा गया है कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज उनकी वास्तविक जन्मतिथि के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की गई है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि यह सब कुछ एक सोची-समझी साजिश के तहत किया गया है ताकि उनके विवाह को अवैध साबित किया जा सके और उनके ऊपर सामाजिक दबाव बनाया जा सके। याचिका में स्पष्ट किया गया है कि मोनालिसा के मूल जन्म प्रमाण पत्र में फर्जी तरीके से बदलाव करके उन्हें जबरन नाबालिग दर्शाने का प्रयास किया गया है, ताकि उनके इस अंतरधार्मिक विवाह को एक कानूनी अपराध के रूप में प्रस्तुत किया जा सके और मामले को सांप्रदायिक रंग दिया जा सके।

​आने वाले दिनों में सुनवाई की संभावना

​विधिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में इस संवेदनशील मामले पर आने वाले दिनों में नियमित सुनवाई शुरू हो सकती है। इस कानूनी लड़ाई के दौरान अदालत के समक्ष उम्र का सही निर्धारण करना, संबंधित सरकारी दस्तावेजों की वैधता की जांच करना और पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के औचित्य को परखना जैसे कई महत्वपूर्ण कानूनी पहलू शामिल होंगे, जिन पर दोनों पक्षों के वकीलों के बीच विस्तृत बहस होने की पूरी संभावना है। फिलहाल यह पूरा घटनाक्रम कानूनी और सामाजिक हलकों में गहराई से देखा जा रहा है।

Share This Article
error: This Content is protected !!